सावन का महीना प्रकृति और देवों के देव महादेव को समर्पित है। हिंदू पौराणिक ग्रंथों के अनुसार यह वही माह है जब समुद्रमंथन हुआ था। समुद्र मंथन में कई दिव्य वस्तुओं के साथ विष भी निकला था, जिसे भगवान शंकर ने अपने कंठ में रखकर इस संपूर्ण सृष्टि को विनाश से बचाया। जब शिव ने इस विष को अपने कंठ में धारण किया तो उनका कंठ नीला हो गया इसलिए भगवान शिव को नीलकंठेश्वर महादेव भी कहा जाता हैं। नीलकंठेश्वर महादेव का अभिषेक यदि श्रावण माह में की जाए तो व्यक्ति को मनोवांछित फल की प्राप्ति होती है।
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इसलिए शिव को अतिप्रिय है अभिषेक
शिवपुराण के अनुसार श्रावण माह में शिवलिंग पर जल इसीलिए अर्पित करते हैं ताकि शिव के कंठ में मौजूद विष के प्रभाव को कम किया जा सके। शास्त्रों का कथन है कि 'शिवः अभिषेक प्रियः' अर्थात कल्याणकारी शिव को अभिषेक अत्यंत प्रिय है। समस्त मनोरथों को पूर्ण करने की शक्ति शिवलिंग के अभिषेक में समाहित है। ब्रह्म का विग्रह रूप ही शिव हैं। ''रुतम -दुःखम द्रावयति-नाशयतीति रुद्रः' यानि भगवान शिव सभी दुखों को नष्ट कर देते हैं। ईश्वर, शिव ,रूद्र, शंकर, महादेव आदि सभी ब्रह्म के ही पर्यायवाची शब्द हैं। इन शिव की शक्ति शिवा है। इनमें सतोगुण सृष्टि के पालक श्री विष्णु एवं रजोगुण सृष्टिकर्ता ब्रह्मा हैं। श्वास वेद हैं एवं सूर्य-चंद्र नेत्र व वक्षस्थल तीनों लोक और चौदह भुवन हैं। विशाल जटाओं में सभी नदियों,पर्वतों और तीर्थों का वास हैं,जहाँ सृष्टि के सभी ऋषि,मुनि,योगी आदि तपस्या में लीन रहते हैं। इसलिए शिवलिंग का पूजन-अभिषेक करने से सभी देवी-देवताओं के अभिषेक का फल उसी क्षण प्राप्त हो जाता है। शिव पुराण में बताया गया है कि अपनी कामनानुसार शिव को अर्पित किए जाने वाले द्रव्यों के लाभ भी अलग-अलग होते हैं।
विवाह की कामना के लिए
विवाह की इच्छा रखने वालों को दूध, बेलपत्र, गंगाजल, शमीपत्र,भांग, खोये की मिठाई तथा गुलाबी रंग के गुलाल से शिवलिंग का अभिषेक करना चाहिए।
ज्वर शांति के लिए
जल की धारा भोलेनाथ को अतिप्रिय है। ज्वर में जो मनुष्य प्रलाप करने लगता है उसकी शांति के लिए जलधारा शुभकारक बताई गई है। इसके आलावा जल से अभिषेक करने पर मनुष्य को सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है।
उत्तम संतान एवं कलह शांति के लिए
दूध से उत्तम संतान की प्राप्ति एवं जब तन-मन में अकारण ही उच्चाटन होने लगे कहीं भी प्रेम न रहे दुःख बढ़ जाए एवं घर में सदैव कलह रहे तब भोले नाथ पर दूध की धारा चढ़ाने से सारा दुःख नष्ट हो जाता है।
मनोनुकूल पति/पत्नी के लिए
गन्ने के रस से यश एवं मनोनुकूल पति/पत्नी की प्राप्ति होती है।
कर्ज मुक्ति के लिए
शास्त्रों में कहा गया है कि शहद से भगवान भोलेनाथ का अभिषेक करने से व्यक्ति को जीवन में कर्ज से मुक्ति मिलती है।
रोग दूर करने के लिए
भगवान शिव को श्रद्धा पूर्वक कुश के जल की धारा चढ़ाने से रोगी व्यक्ति को रोगमुक्ति मिलती है। इसी प्रकार घी से अभिषेक करने पर जीवन में आरोग्यता आती है एवं वंशवृद्धि होती है।
मोक्ष और भोग की कामना के लिए
पंचामृत से अष्टलक्ष्मी व गंगाजल एवं तीर्थों के जल से समस्त कामनाओं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
आकर्षक व्यक्तित्व के लिए
चन्दन मिश्रित जल भोलेनाथ पर चढाने से व्यक्तित्व आकर्षक होता है।इसी प्रकार भांग चढाने से बुराइयां और मन के विकार दूर होते हैं।
श्रेष्ठ बुद्धि के लिए
बुद्धि की जड़ता को समाप्त करने एवं कुशाग्र बुद्धि के लिए विद्यार्थियों को शिवजी पर शर्करा मिश्रित दुग्ध की धारा चढ़ानी चाहिए।इसी प्रकार सुबासित तेल से पूजा करने पर सारा दुःख नष्ट हो जाता है।
शत्रु पर विजय पाने के लिए
सरसों के तेल से भगवान शिव का अभिषेक करने से शत्रु पराजित होते हैं।