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इस देवता की पूजा से जीवन में सुख-समृद्घि आएगी: सुधांशु जी महाराज

Mon, 30 Sep 2013 10:43 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली
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महर्षि वेदव्यास एक स्थान पर लिखते हैं, ‘‘प्रिणाति मातरं येन पृथिवी तेन पूजिता’’ मतलब जो माता को प्रसन्न करता है समझो उसने पृथ्वी माता की पूजा की है। इसीलिए तो कहा जाता है ‘‘माता गुरुतरे भूमेः’’ मां भूमि से भी भारी है। क्योंकि मां अपने बच्चे के लिए अपना सारा सुख-सकून बलिदान करती है। स्वयं खाए न खाए लेकिन बच्चों को खिलाकर ही तृप्त होती है।
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इसलिए भारतीय संस्कृति और सभ्यता के प्रेरणा स्रोत वेद, उपनिषद्, रामायण, गीता, पुराण आदि समस्त धर्मग्रन्थों तथा महापुरुषों की मातृ-पितृ भक्ति के प्रमाणों की एक स्वर में पुकार के आधर पर आधरित पर्व की नींव रखी गई जिसे ‘‘श्राद्घपर्व’ कहते हैं।

उपनिषद् में ‘मातृदेवो भव, पितृदेवो भव,’’ आदि ब्रह्म वाक्यों द्वारा माता-पिता की गरिमा का गुणगान कर जो इनके प्रति अपनी भावपूर्ण संवेदनाएं प्रकट की हैं, निश्चय ही वह उनके त्याग, तपस्या, सेवा स्नेह, विश्वास और कर्तव्य परायणता का ही सुपरिणाम है।
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मनुस्मृति में मनु महाराज ने कहा है ‘‘संतान सैकड़ों वर्षों तक माता-पिता की सेवा करे, लेकिन फिर भी प्रसव वेदना, पालन और शिक्षण आदि में माता-पिता जिस कष्ट को सहते हैं, उसका बदला संतान नहीं चुका सकती। माता की महान ममता और पिता का परम स्नेह अमूल्य तथा अनुपम बताते हुए वेद भगवान का उद्घोष है कि पुत्र को अपने पिता का आज्ञाकारी तथा मां की संवेदनाओं-भावनाओं को समझने वाला होना चाहिए।

मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम, भगवान श्रीगणेश, भीष्म पितामह, श्रवणकुमार, नचिकेता व भक्त पुण्डरीक आदि मातृ-पितृ भक्तों की आदर्श प्रेरणा बता रही है कि श्राद्घपर्व का दीप जलाने से ही हम सबका जीवन जगमगाएगा। इस महान त्योहार को मनाने से ही हमारा मस्तक गर्व से ऊंचा होगा। तभी हमारे जीवन की सार्थकता सिद्घ होगी। जीवित माता-पिता व बुजुर्गों के आशीर्वाद से ही जीवन में सुख-समृद्घि एवं शांति की प्राप्ति हो सकती है।
साभारः विश्व जागृति मिशन

श्री सुंधाशु जी महाराज जीवन परिचय
सुधांशु जी महाराज का जन्म 2 मई 1955 को उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले में हुआ। इन्होंने गायत्री मंत्र द्वारा अज्ञानता दूर करने की विधि को जाना। बाल्यावस्था में ही इन्होंने मंत्र और श्लोकों का अच्छा ज्ञान अर्जित कर लिया था। 24 मार्च 1991 को रामनवमी के दिन इन्होंने दिल्ली में विश्व जागृति मिशन की स्थापना की।

देश-विदेश में इसकी कुल 80 शाखाएं हैं। इस मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज भारत ही नहीं विदेशों में भी अध्यात्म और जनकल्याण का संदेश प्रचारित कर रहे हैं। इनका मिशन निर्धनों और कमज़ोर व्यक्तियों की सहायता करता है।

दिल्ली स्थित इनके आनन्दधम आश्रम में अस्पताल मौजूद हैं जहां गरीब व्यक्तियों को मुफ्त चिकित्सा सेवा उपलब्ध करायी जाती है। अन्य आश्रमों में भी बुजुर्गों एवं गरीबों के लिए विशेष सुविधाओं की व्यवस्था की गयी है। समय-समय पर विश्व जागृति मिशन के द्वारा सुधांशु जी महाराज देश-दुनिया में पीड़ित लोगों की सेवाओं में भी योगदान देते हैं।
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