अच्छे और बुरे कर्म केवल उसी व्यक्ति के लिए होते हैं, जो द्वैत में जीता है। जबकि जीवन और मृत्यु के पार की सोचने वाले व्यक्ति के लिए अच्छे कर्म भी उतने ही बेकार होते हैं, जितने बुरे कर्म।
उसके लिए तो कर्म, मात्र कर्म होता है। जो व्यक्ति अस्तित्व के साथ एक होना चाहता है, उसके लिए कुछ भी अच्छा या बुरा नहीं होता। उसके लिए सभी कर्म बाधक हैं, सभी एक बोझ हैं।
वह सारे बोझों को गिरा देना चाहता है। वह ऐसा नहीं सोचता कि ‘अगर तुम मुझे एक क्विंटल सोना दोगे तो मैं उसे ढोने के लिए तैयार हूं, लेकिन तुम मुझे एक क्विंटल कूड़ा दोगे तो मैं उसे नहीं ढो सकता।’ समझदार व्यक्ति देखता है कि चाहे वह सोना ढोए या कूड़ा, उसके लिए दोनों ही बोझ हैं।
जबकि दूसरा आदमी सोचता है कि सोना कूड़े से बेहतर होता है। अगर आप में भरपूर चेतनता है, तो आप यह देख सकते हैं कि हर कार्य का एक परिणाम होता है। अगर आप आनंदपूर्वक परिणाम को स्वीकार कर सकते हैं, तो फिर आप अपनी मर्जी के मुताबिक कुछ भी कीजिए कोई फर्क नहीं पड़ता। जो कार्य आपके जीवन में नकारात्मक या अशुभ परिणाम लाता है, उसे अक्सर आप बुरा कार्य कहते हैं। सवाल अच्छे या बुरे का नही।
हमारी निगाह काम की कसौटी उसके परिणाम हैं। जिस काम के परिणाम मन को भाते हैं वे हमें अच्छे लगते हैं। और जिनसे तकलीफ होती है वे बुरे लगते हैं। इसलिए ऐसा कुछ भी शुरू मत कीजिए, जिसे आप संभाल नहीं सकते। यह अच्छे और बुरे की बात नहीं है; सिर्फ अपने जीवन को समझदारी से जीने की है। आप ऐसा कोई पत्थर उठाने की कोशिश मत कीजिए, जिसका बोझ आप ढो न सकें।
आप वही चुनिए, जिसे आप संभाल सकें। हर कार्य के साथ सिर्फ यही ध्यान रखने की बात है। अगर आप इस चीज को अपनी चेतनता में ले आते हैं तो फिर चिंता नहीं करनी पड़ती कि क्या अच्छा है और क्या बुरा है। तब आप बस वही करते हैं, जो आपके लिए जरूरी है- न उससे ज्यादा, न उससे कम।