फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

सांसारिक सुख से संतुष्टि नहीं मिलतीः दाती जी महाराज

Mon, 08 Apr 2013 12:18 PM IST
नई दिल्ली/इंटरनेट डेस्क।
विज्ञापन
विज्ञापन
प्रकृति द्वारा प्रदत्त प्रत्येक वस्तु में निश्चय ही सुख है किंतु उसकी अनुभूति इंद्रियों के माध्यम से होती है और थोड़े समय के लिए होती है। इस प्रकार के सुख भोगते-भोगते मनुष्य बूढ़ा हो जाता है किंतु अंदर से असंतुष्ट ही रहता है।
विज्ञापन


सद्गुरु के द्वारा दिये गये ज्ञान की अनुभूति से जीवन के हर पहलू पर एक संतुलन, एक पैनी परख और एक अद्भुत संतुष्टि का एहसास संभव है। कोई भी मनुष्य यदि उस मार्ग में बढऩे का बराबर और लगातार प्रयास करे तो उसे अंतरतम की संतुष्टि अवश्य मिल सकती है और वह सुखी हो सकता है।

अंतरतम की संतुष्टि अपने आप में पूर्ण रूप में विद्यमान हैं। वह किसी वस्तु विशेष से जुडऩे का परिणाम नहीं है बल्कि रचयिता की ओर से प्रत्येक मानव के अंदर दी हुई है। उससे कैसे जुड़े, इसी के लिए मनुष्य को सच्चे मार्गदर्शक से सही विधि की जानकारी प्राप्त करने हेतु प्रयास करने की आवश्यकता है।
विज्ञापन


मार्गदर्शक सद्गुरु सच्चे मिल गये- इसकी पुष्टि स्वयं अंदर में प्राप्त अनुभूति, आनंद और प्रेम से होती है। ऐसा आनंद प्राप्त करने वाला मनुष्य स्वयं निर्णायक होता है। जब मनुष्य को उस असली सुख का परिचय मिलता है तो वह कृतार्थ हो जाता है।
साभारः परमहंस दाती जी महाराज

दाती जी महाराज परिचय
दाती जी महाराज का जन्म 10 जुलाई 1950 को राजस्थान के पाली जिला में अलावास गांव में हुआ। दाती जी महाराज बचपन से ही तीक्ष्ण बुद्घि के स्वामी थे। बाल्यकाल में ही इनका लगाव ईश्वर से हो गया था। इन्होंने संसार में व्याप्त ज्योतिष, ध्यान और शनि संबंधित भ्रांतियों को दूर करने का विचार किया। इनकी विद्या, ज्ञान और कृपा से बहुत से भक्त लाभ प्राप्त कर रहे हैं। दाती जी के तीन प्रमुख सिद्घांत हैं सेवा, सतसंग और सुमिरन।
विज्ञापन

और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें