हिंदू धर्म में कई तरह के पूजा-अनुष्ठान, रीति- रिवाज और परंपराएं निभाई जाती हैं। बालक के जन्म से लेकर मृत्यु तक कुल सोलह संस्कार बताए गए हैं जो समय के साथ-साथ चलती रहती हैं। हिंदू धर्म में किसी भी तरह की पूजा के बाद कलाई पर कलावा बांधा जाता है। कोई भी पूजा पाठ बिना कलावे के पूरी नहीं होता है। मान्यताओं के अनुसार कलावे में कई तरह की दैवीय शक्तियां समाहित होती है। जो व्यक्ति को बुरी नजर, परेशानी और नकारात्मक ऊर्जाओं के प्रभाव से बचाता है। कलावा को रक्षासूत्र और मोली भी कहा जाता है। कलावे के बिना किसी भी तरह का शुभ कार्य संपन्न नहीं होता है। कलावा सस्ंकृति, संकल्प, रक्षा और विश्वास का प्रतीक माना जाता है।