रविवार, 13 अक्टूबर को आश्विन मास की पूर्णिमा है, जिसे शरद पूर्णिमा कहा जाता है। धार्मिक कथाओं के अनुसार द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने शरद पूर्णिमा की रात में ही गोपियों के साथ रासलीला रचाई थी। मान्यता है कि आज भी शरद पूर्णिमा की रात्रि में श्रीकृष्ण गोपियों के साथ वृंदावन में रासलीला रचाते हैं।
गोपियां श्रीकृष्ण को अपना पति बनाना चाहती थी
द्वापर युग में गोपियां श्रीकृष्ण को पति रूप में पाना चाहती थीं। जब सभी गोपियों ने अपनी यह इच्छा श्रीकृष्ण को बताई तो श्री कृष्ण ने ये कामना पूरी करने का वचन दिया। शरद पूर्णिमा की रात्रि में चंद्रमा अपनी 16 कलाओं के साथ दिखाई देता है और इस तिथि पर श्रीकृष्ण ने रात्रि में यमुना तट के पास सभी गोपियों को मिलने के लिए बुलाया। धार्मिक कथाओं के अनुसार जितनी गोपिया श्रीकृष्ण से मिलने आई, उतने ही रूप श्री कृष्ण ने धारण किए और सभी गोपियों के साथ रास रचाया।
निधिवन (वृन्दावन) में तुलसी के पेड़ हैं जोड़ों में
निधिवन में तुलसी के पेड़ हैं और ये सामान्य तुलसी के पौधों जैसे नहीं हैं। तुलसी के इन पेड़ों की शाखाएं जमीन की ओर आती हैं। सबसे खास बात यह है कि यहां तुलसी के पेड़ जोड़ों में हैं। मान्यता है कि जब श्रीकृष्ण निधिवन में गोपियों संग रास रचाते हैं तो ये सभी पेड़ गोपियां बन जाती हैं और सुबह होते ही फिर तुलसी के पेड़ में बदल जाती हैं।
निधिवन (वृन्दावन) के रंगमहल में आते हैं राधा कृष्ण
निधिवन में ऐसी मान्यता है कि यहां रोज रात को राधा-कृष्ण आते हैं। रंग महल में राधा और श्रीकृष्ण के चंदन के पलंग को शाम सात बजे से पहले सजा दिया जाता है। पलंग के पास में एक लोटा पानी, राधाजी के श्रृंगार का सामान, दातुन, पान रख दिया जाता है। सुबह बिस्तर अस्त-व्यस्त मिलता हैं और लोटा खाली मिलता है। वह पर उपयोग की हुई दातुन भी दिखाई देती है। पान भी खाया हुआ मिलता है। माना जाता है कि इन सभी चीजों का उपयोग श्रीकृष्ण और राधा रानी करते हैं।