सावन का पवित्र महीना चल रहा है। देशभर के सभी शिवालयों में इस समय भोले भंडारी के जयकारे गूंज रहे हैं। इस दौरान एक बार फिर यह विषय चर्चा में है कि क्या शिवलिंग में रेडियोएक्टिव के तत्व होते हैं। भारत का रेडियोएक्टिविटी का नक्शा उठा लें, तो हैरान हो जाएंगे ! भारत सरकार के नुक्लियर रिएक्टर के अलावा सभी ज्योतिर्लिंगों के स्थानों पर सबसे ज्यादा रेडिएशन पाया जाता है।
शिवलिंग और कुछ नहीं बल्कि न्यूक्लियर रिएक्टर्स ही हैं, तभी तो उन पर जल चढ़ाया जाता है ताकि वो शांत रहे। महादेव के सभी प्रिय पदार्थ जैसे बिल्व पत्र, आक, आकमद, धतूरा, गुड़हल, आदि सभी न्यूक्लियर एनर्जी सोखने वाले चीजें है।
इसके अलावा शिवलिंग पर चढ़ा पानी भी रिएक्टिव हो जाता है इसीलिए तो जल निकासी नलिका को लांघा नहीं जाता। भाभा एटॉमिक रिएक्टर का डिज़ाइन भी शिवलिंग की तरह ही है। शिवलिंग पर चढ़ाया हुआ जल नदी के बहते हुए जल के साथ मिलकर औषधि का रूप ले लेता है। हमारी परम्पराओं के पीछे कितना गहन विज्ञान छिपा हुआ है। विज्ञान को परम्पराओं का जामा इसलिए पहनाया गया है ताकि वो प्रचलन बन जाए और हम भारतवासी सदा वैज्ञानिक जीवन जीते रहें।..