पंचांग के अनुसार, 2024 में श्राद्ध पक्ष 17 सितंबर को भादो महीने की पूर्णिमा के दिन आरंभ हुआ था जो 2 अक्तूबर यानी आश्विन महीने की अमावस्या तक रहेगा। इस दिन पितृ पक्ष खत्म हो जाएगा। आश्विन माह की अमावस्या को ही सर्वपितृ अमावस्या भी कहते हैं। सर्वपितृ अमावस्या के दिन तर्पण, श्राद्ध, पिंडदान आदि करना चाहिए। दिवंगत पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए यह अनुष्ठान किया जाता है। अगर पितृ पक्ष में किसी मृत व्यक्ति का श्राद्ध करना भूल गए हैं या किसी की मृत्यु तिथि मालूम नहीं है तो उसका श्राद्ध कर्म इस अमावस्या पर किया जा सकता है।
पितृ अमावसु से जुड़ी है सर्वपितृ अमावस्या की कथा
कथा के अनुसार प्राचीन काल में अग्निष्वात और बर्हिषपद नाम के पितृ देव थे। उनकी एक मानस कन्या थीं अक्षोदा। अक्षोदा ने आश्विन मास की अमावस्या पर पितरों को प्रसन्न करने के लिए तप किया था। तपस्या से प्रसन्न होकर सभी पितर देवता अक्षोदा के समक्ष प्रकट हुए। उस समय अक्षोदा का पूरा ध्यान एक तेजस्वी पितर अमावसु की ओर ही था और वह उन्हें अपलक निहारती रहीं, उसने अमावसु से कहा, "वरदान में आप मुझे स्वीकारें मैं आपका संग चाहती हूं।'
अक्षोदा की इस बात से सभी पितृ क्रोधित हो गए और उन्होंने उसे श्राप दिया कि वह पितृ लोक से पृथ्वी लोक जाएंगी। ये सुनकर अक्षोदा को अपनी गलती का अहसास हुआ हुआ और वह क्षमा याचना करने लगी। तब पितरों ने दया कर उससे कहा कि वह मत्स्य कन्या के रूप में जन्म लेगी। वहां ब्रह्माजी के वंशज महर्षि पाराशर उस मत्स्य कन्या को पति रूप में मिलेंगे और उसके गर्भ से भगवान वेद व्यास जन्म लेंगे। इसके बाद फिर श्राप मुक्त होकर वह फिर से पितर लोक में वापस आ जाएगी।
पितृ अमावसु को पितर देवताओं ने दिया वरदान
पितृ अमावसु से प्रसन्न होकर अन्य पितरों ने उनकी सराहना की और उन्हें वरदान दिया कि स्त्री के सौन्दर्य के आगे आपने अपने मन को स्थिर रखा और अपने नियम पर अडिग रहे इसीलिए ये तिथि आपके नाम से अमावसु के रूप में जानी जाएगी। मान्यता है कि तभी से ये दिन सर्व पितृ अमावस्या के रूप में प्रसिद्ध हुआ है।
सर्वपितृ अमावस्या तिथि ?
वैदिक पंचांग के अनुसार आश्विन माह में पड़ने वाली कृष्ण पक्ष की यह अमावस्या तिथि 1 अक्टूबर 2024 को प्रातः 9:34 बजे प्रारंभ होकर 2 अक्टूबर 2024 को 24:18 बजे समाप्त होगी। उदयतिथि के अनुसार 2 अक्टूबर को अमावस्या की पूजा होगी। इस दिन कुतुप मुहूर्त सुबह 11:45 बजे से दोपहर 12:24 बजे तक है। उसके बाद रोहिण मुहूर्त दोपहर 12:34 बजे से दोपहर 1:34 बजे तक होगा।
कुतुप और रोहिण मुहूर्त के अलावा दोपहर में तर्पण करना भी शुभ माना जाता है। दरअसल, तर्पण पूजा दोपहर में ही होती है। ज्योतिषियों के अनुसार दोपहर के समय किया गया तर्पण पितरों द्वारा स्वीकार किया जाता है। सर्वपितृ अमावस्या में तर्पण का मुहूर्त 2 अक्टूबर को दोपहर 1 बजकर 21 मिनट से अपराह्न 3:43 बजे तक है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।