विवाह के समय कई प्रकार के रश्मो रिवाज निभाए जाते हैं। हर रश्म और रिवाज का कुछ न कुछ मतलब जरुर होता है। दुल्हे के घोड़ी चढ़ाने से लेकर दुल्हन की मांग में सिंदूर भरने तक हर रिवाज के एक खास मायने होते हैं।
दुल्हे के घोड़ी चढ़ने का मतलब यह होता है कि अब वह वैवाहिक जीवन की जिम्मेदारियों को निभाने और जीवनसाथी की रक्षा करने के योग्य हो चुका है।
सिंदूर लगाकर पति यह संदेश देता है कि अब यह स्त्री विवाहिता है और इसकी ओर बुरी दृष्टि से देखने की गलती न करें। इसी प्रकार एक रिवाज है विवाह के समय ध्रुव तार देखना। विवाह के रिवाजों में एक रिवाज यह भी है कि फेरे के समय पति-पत्नी को आसमान में सप्तऋषियों को साथ ध्रुव तारा का दर्शन करवाया जाता है।
ध्रुव तारा दर्शन करवाने का उद्देश्य यह है कि जिस तरह आसमान में ध्रुव तारा स्थिर है उसी प्रकार वर-वधू का प्रेम और सुहाग स्थिर रहेगा। पति-पत्नि दृढ़ता पूर्वक अपने दांपत्य जीवन के कर्तव्य को निभा सकें।