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Rang Panchami 2024: देवताओं संग होली खेलने का दिन रंग पंचमी आज, महत्व और पूजा विधि

Sat, 30 Mar 2024 10:09 AM IST
विनोद शुक्ला पं.जयगोविंद शास्त्री, ज्योतिषाचार्य

सार

'श्रीरंग पंचमी' का ये उत्सव व्रजवासियों और कृष्ण भक्तों के लिए विविध प्रकार के रंगों से सराबोर कर देने होता है। इस दिन भी लोग एक-दूसरे पर अनेकों प्रकार के रंगों की बौछार करते हैं। 
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Rang Panchami 2024: व्रजवासियों और कृष्ण भक्तों के लिए विविध प्रकार के रंगों से सराबोर कर देने होता है। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Rang Panchami 2024: आज ( 30 अप्रैल 2024) देशभर में श्रीरंग पंचमी का पर्व मनाया जा रहा है। इस वर्ष मंगल, बुध, गुरु और शनि अर्थात लाल, हरे, पीले और आसमानी रंगों की प्रधानता के साथ खेला जाने वाला 'श्रीरंग पंचमी' का महापर्व 30 मार्च शनिवार को, शनि के ही नक्षत्र अनुराधा और इनके ही संयोग से निर्मित होने वाले योग 'सिद्धियोग' में मनाया जाएगा। 'श्री' अर्थात् राधा और 'रंग' अर्थात् 'कृष्ण' के नाम से मनाया जाना जाने वाला 'श्रीरंग पंचमी' का ये उत्सव व्रजवासियों और कृष्ण भक्तों के लिए विविध प्रकार के रंगों से सराबोर कर देने होता है। इस दिन भी लोग एक-दूसरे पर अनेकों प्रकार के रंगों की बौछार करते हैं। 

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दीवानगी भरे इस उत्सव के दिन सभी देवी-देवता भी व्रजक्षेत्र में परब्रह्म के साथ रंगोत्सव मनाकर परमानन्दित होते हैं। मध्य भारत में सर्वाधिक हर्षोल्लास के साथ मनाया जाने वाला यह पर्व प्रकृति में नई ऊर्जा का संचार कर देता है। इसी के साथ रंगोत्सव पर्व का औपचारिक समापन भी हो जाता है।

अपने-अपने मंदिर के देवों के साथ भी मनाएं रंगोत्सव
पुरुष अर्थात् 'श्रीविष्णु' और प्रकृति अर्थात् श्रीमहालक्ष्मी का वास तो चराचर जगत के कण-कण में विद्यमान है ही,श्रद्धावान सभी सनातनधर्मियों के घर में भी ये साक्षात विराजमान रहते हैं, इसलिए इसदिन अपने-अपने घर के मंदिर में विराजित मूर्तियों को, चाहे वे किसी भी देवी-देवता की हों, उनके साथ भक्तिभाव और खूब उल्लास के साथ श्रीरंग पंचमी का पर्व मनाते हुए सभी मूर्तियों को विविध प्रकार के रंगों से सराबोर-स्नान कर देना चाहिए। ऐसा करते हुए संभव हो तो श्री राधे-कृष्ण के लिए कहे गये अनेका-नेक मंत्रों से स्तुति करनी चाहिए। 
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यदि कोई भी मंत्र न आता हो तो 'हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, कृष्ण कृष्ण रहे हरे। हरे राम, हरे राम, राम राम हरे हरे। इस मंत्र से ही अबीर-गुलाल आदि रंगों से स्नान कराना चाहिए, उसके बाद शुद्ध जल से स्नान कराकर वस्त्र, गंध, अक्षत, पुष्प, धूप दीप, नैवेद्य,ऋतुफल आदि यथोपलब्ध सामग्री के साथ पूजन-आरती करके पुनः उन्हें अपने घर के मंदिर में स्थापित करने चाहिए। ऐसा करने से घर की वास्तु शुद्धि तो होती ही है माहौल में एक नई और सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी हो जाता है यहाँ तक कि, परिवार पर आये घोर से घोर से संकटों का भी निवारण हो जाता है।

श्रीरंग पंचमी की एक और कथा
रंग पंचमी को लेकर एक और कथा है कि, जब देवगणों ने कामदेव को भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए मजबूर किया तो कामदेव ने उनपर अपने 'पुष्पबाण' का प्रयोग किया जिसके परिणामस्वरूप महादेव की योगनिद्रा टूटी, और उन्होंने ने अपने तीसरे नेत्र की क्रोधाग्नि से तक्षण कामदेव को भस्म कर दिया। तब तीनों लोकों में श्रृंगाररस विलुप्त हो गया और सब दिशाओं में उदासी छा गई। ब्रह्मा आदि सभी देवी-देवता चिंतित हो गए कि बिना कामदेव की सहायता के किस तरह सृष्टि का सृजन किया जाय तो सभी ने एकसाथ भगवान शिव से प्रार्थना की कि, प्रभु सृष्टि में प्रलय से पहले प्रलय न लायें कामदेव को जीवनदान दें, कामदेव की पत्नी रति की स्तुति से प्रसन्न होकर महादेव ने उन्हें पुनः जीवित करने की प्रार्थना तो स्वीकार कर लिया किन्तु कामदेव का शरीर तो शिव के तीसरे नेत्र की क्रोधाग्नि में जलकर भस्म हो चुका था फिर भी महादेव ने उन्हें वगैर शरीर के ही जीवित कर दिया जिसके फलस्वरूप कामदेव का एक और नाम 'अनंग' (बिना अगों वाला)पड़ा। ऐसा करने से तीनों लोकों के प्राणी आनंदित होकर रंगोत्सव मनाने लगे तभी से हर वर्ष चैत्र कृष्ण पंचमी को श्रीरंग पंचमी का उत्सव मनाया जाता है।

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