फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pitru Paksha 2021: श्राद्ध पक्ष में क्यों कराया जाता है कौए को भोजन ?

Thu, 23 Sep 2021 10:13 AM IST
विनोद शुक्ला अनीता जैन ,वास्तुविद

सार

श्राद्धपक्ष में कौओं को पितरों का प्रतीक मानते हुए उन्हें आमंत्रित कर उन्हें श्राद्ध का भोजन खिलाया जाता है। मान्यता के अनुसार कौए को देवपुत्र माना गया है। प्रसंग आता है कि स्वर्ग के अधिपति इन्द्र के पुत्र जयंत ने ही सबसे पहले कौए का रूप धारण किया था।
विज्ञापन
pitru paksha 2021: पितृदोष से मुक्ति के लिये भी पितरों की शांति आवश्यक मानी जाती है। - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

श्राद्ध पक्ष में पितरों को कई प्रकार के स्वादिष्ट पकवानों का भोग लगाया जाता है। ऐसा करने से पितर संतुष्ट होकर अपने परिजनों को दीर्घायु, आरोग्य, धन-संपत्ति, स्वर्ग प्राप्ति जैसे सभी सुख प्राप्ति का आशीर्वाद प्रदान करते हैं। श्राद्ध पक्ष में कौओं का बड़ा ही महत्व है, इन्हें भी पितरों को भोजन कराने का माध्यम माना जाता है। ऐसी मान्यता है कि यदि इस दौरान कौआ आपके द्वारा दिया गया भोजन ग्रहण कर ले, तो आपके पितर आप से प्रसन्न हैं। इसके विपरीत यदि कौए भोजन करने नहीं आये तो यह माना जाता है कि आपके पितर आपसे रुष्ट हैं। क्या आप जानते हैं कि श्राद्ध पक्ष में कौओं को भोजन क्यों कराया जाता है ?

विज्ञापन


माता सीता से जुडी है यह कथा
श्राद्धपक्ष में कौओं को पितरों का प्रतीक मानते हुए उन्हें आमंत्रित कर उन्हें श्राद्ध का भोजन खिलाया जाता है। मान्यता के अनुसार कौए को देवपुत्र माना गया है। प्रसंग आता है कि स्वर्ग के अधिपति इन्द्र के पुत्र जयंत ने ही सबसे पहले कौए का रूप धारण किया था। त्रेता युग में जयंत ने कौए का रूप धारण कर माता सीता के पैर में चोंच मारकर उनको कष्ट पहुंचाया था। यह देखते ही प्रभु श्रीराम उस कौए पर क्रोधित हुए और उन्होंने तिनके को अस्त्र बनाकर उसकी एक आंख पर प्रहार किया,जिससे उसकी एक आंख क्षतिग्रस्त हो गई। पश्चाताप होने पर कौए रुपी जयंत ने अपने अपराध के लिए प्रभु श्रीराम से क्षमा मांगी। तब प्रभु ने उसके उस रूप को वरदान दिया कि उसे अर्पित किया गया भोजन पितरों को मिलेगा। तभी से श्राद्ध में कौवों को भोजन कराया जाता है।

ब्राह्मण से पूर्व इन्हें भोजन दें
श्राद्ध कर्म के दिन ब्राह्रमण को भोजन कराने से पहले दक्षिण की ओर मुख करके पंचबलि गाय, कुत्ते, कौए, देवतादि और चींटी के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
विज्ञापन


गोबलि- गाय के लिए पत्तेपर 'गोभ्ये नमः' मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री निकालें।
श्वानबलि- कुत्ते के लिए भी 'द्वौ श्वानौ' नमः मंत्र पढ़कर भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें।
काकबलि- कौए के लिए 'वायसेभ्यो' नमः' मंत्र पढ़कर पत्ते पर भोजन सामग्री निकालें।
देवादिबलि- देवताओं के लिए 'देवादिभ्यो नमः' मंत्र पढ़कर और चींटियों के लिए 'पिपीलिकादिभ्यो नमः' मंत्र पढ़कर चींटियों के लिए भोजन सामग्री पत्ते पर निकालें। इसके बाद दक्षिण दिशा की ओर मुख करके कुश, तिल और जल लेकर हथेली में स्थित पितृतीर्थ से संकल्प करें और एक या तीन ब्राह्मण को भोजन कराएं।

विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें