Mahakaleshwar, Ujjain: शिवपुराण के अनुसार श्रीमहाकाल की परमशक्ति माँ श्रीमहाकाली हैं जिनका महाविद्याओं सर्वोच्च स्थान है।
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वर्तमान श्रीश्वेतवाराह कल्प में श्रीमहाकाल तीनों लोकों में त्रयज्योतिर्लिंग के रूप विद्यमान हैं जिनमें 'आकाशे तारकं लिंगम पाताले हाटकेश्वरम । भूलोके च महाकाल लिंगत्रय नमोस्तुते ।। अर्थात- देवताओं की आराधना के लिए आकाश में तारक ज्योतिर्लिंग, महादैत्यों की आराधना के पाताल में हाटकेश्वर तथा पृथ्वी वासियों की समस्त मनोकानाएं पूर्ण करने के लिए मध्य प्रदेश राज्य के उज्जयिनी में श्रीमहाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग के रूप में विद्यमान हैं। शिवपुराण के अनुसार श्रीमहाकाल की परमशक्ति माँ श्रीमहाकाली हैं जिनका महाविद्याओं सर्वोच्च स्थान है। सृष्टि संहार में ये ही महाकाल की सहायक रहती हैं। कहा गया है कि उसका काल भी क्या करे जो भक्त हो महाकाल का।
महाकाल सूक्षतमकाल के भी नियंत्रक हैं जीवन में काल की महत्ता सर्वोपरि है जिसने प्राणी काल को साध लिया काल उसका सहायक हो गया जिसने काल का तिरस्कार किया वह महाकाल की ज्वालाग्नि में भष्म हो गया।श्रीमहाकालेश्वर मृत्युलोक के अधिपति हैं। तांत्रिक परम्परा में प्रसिद्ध दक्षिणमुखी पूजा का महत्व बारह ज्योतिर्लिंगों में केवल श्रीमहाकालेश्वर को ही प्राप्त है इसीलिए यहाँ वाममार्गी और दक्षिण मार्गी दोनों प्रकार के भक्तों की भारी भीड़ रहती है इनके दर्शनमात्र से ही मोक्ष की प्राप्ति होती है और स्वप्न में भी किसी प्रकार का संकट नहीं आ सकता, जो भी सच्चे मन से श्रीमहाकालेश्वर की उपासना करता है, उसकी सभी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती हैं।
इनके विषय में पुराणों कहा गया है कि, 'महाकालेश्वरो नाम शिवः ख्यातश्च भूतले। तं दुष्ट्वा न भवेत् स्वप्ने किंचिददुःखमपि द्विजाः ।। यं यं काममपेदैव तल्लिगं भजते तु यः । तं तं काममवाप्नोति लभेन्मोक्षं परत्र च ।।
अर्थात- भूलोक पर जो महाकालेश्वर नाम से ज्योतिर्लिंगशिव हैं उनकी पूजा-आराधना से स्वप्न में भी दुःख प्रवेश नहीं कर सकता। उसकी प्रतीक्षित सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। अवन्तिकापुरी में इनका प्राकट्य अपने 'रुद्राभिषेकीब्राहमण' भक्तों की 'दूषण' नामक महादैत्य से रक्षा के लिए हुआ। उन्हीं ब्राह्मणों के स्तवन से प्रसन्न होकर श्रीमहाकाल ने दैत्य सेना का हुंकार मात्र से संहार कर दिया और भक्तों के दुःख दूर करने के लिए यहीं महाकाल के रूप में प्रतिष्ठित हुए। इनका अमोघमंत्र ॐ नमः शिवाय करालं महाकाल कालं कृपालं ॐ नमः शिवाय' का प्रातः काल जप करके प्राणी कोई भी कार्य आरम्भ करे और यात्रा पर जाय तो कार्य निर्विघ्न पूर्ण होते हैं और प्राणी सकुशल घर वापस आता है।