चंद्रायण व्रत इसके बारे में बहुत ही कम लोगों को जानकारी होती है। यह व्रत बहुत ही प्राचीन और लाभप्रद है। प्राचीन काल में ऋषि मुनियों के द्वारा इस व्रत को किया जाता था और वे लगातार इस उपवास को करते हुए स्वस्थ रहते थे। हालांकि आज के समय में भी कुछ साधक इस व्रत को करते हैं। यह केवल एक व्रत नहीं बल्कि चंद्रायण साधना होती है। इस व्रत का मूल विधान चंद्रमा की सोलह कलाओं के अनुसार भोजन के कौर से संबद्ध है। यह व्रत अत्यंत कठिन होता है लेकिन यह उतना ही शुभफलदायक भी माना गया है। शास्त्रों के अनुसार इस व्रत को करने से सभी पापों का प्रायश्चित संभव है। जानते हैं कि कैसे किया जाता है चंद्रायण व्रत और क्या है इसका महत्व।