देवी-देवताओं के वाहन
हंस है मां सरस्वती का वाहन
हंस पवित्र, जिज्ञासु और समझदार पक्षी होने के साथ-साथ जीवनपर्यंत एक ही हंसनी के साथ रहता है। परिवार में प्रेम और एकता का यह उत्तम उदहारण है। इसके अलावा हंस के सामने दूध और पानी मिलाकर रख दें, तो वह केवल दूध पी लेता है और पानी छोड़ देता है। कहने का तात्पर्य यह कि हंस सिर्फ गुण ग्रहण करता है, अवगुण छोड़ देता है। हंस मोती चुगकर सर्वश्रेष्ठ को ग्रहण करने का संदेश देता है।