कार्तिक मास का आरंभ हो चुका है। शास्त्रों में कार्तिक मास को उत्तम मास बताया है क्योंकि इस माह भगवान विष्णु निद्रा से जागते हैं। स्कन्द पुराण के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती के पुत्र कार्तिकेय ने तारकासुर का वध भी इसी माह में किया था, इसके लिए इसका नाम कार्तिक पड़ा। साथ ही भगवान विष्णु नारायण रूप में धरती पर जल में विश्राम करते हैं। इस मास में पवित्र नदियों में स्नान, दान, उपासना, हवन आदि करने के विशेष महत्व है। कार्तिक माह में ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करने से धरती के सभी तीर्थों का पुण्य प्राप्त होता है। कार्तिक मास में दीपदान का भी विशेष महत्व बताया गया है।
पद्म पुराण, नारद पुराण और स्कन्द पुराण में कार्तिक मास का विशेष माहात्म्य बताया है। इस मास में की गई प्रार्थना सीधे देवों तक पहुंचती है, इसलिए इसे मोक्ष का द्वार भी कहा गया है। कार्तिक मास 21 अक्टूबर से प्रारंभ है। कार्तिक मास वैसे तो बहुत फलदायी है लेकिन इन दिनों हमें भूलकर भी कोई ऐसा कार्य नहीं करना चाहिए जिसका हमें अशुभ फल भुगतना पड़े। आइए जानते हैं क्या है वो कार्य जो हमें भूलकर भी नहीं करने चाहिए।