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हनुमान जयंती विशेषः इस तरह नाम पड़ा हनुमान

Wed, 22 Oct 2014 12:28 PM IST
पं. जयगोविंद शास्त्री/ज्योतिषशास्त्री
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वायुपुराण का संदर्भ है कि एक बार हनुमान ने उदित हो रहे सूर्य को फल समझकर मुह में भर लिया। इससे संसार में अंधेरा छा गया। हनुमान के इस कृत्य से नाराज हो कर इन्द्र ने आंजनेय पर वज्र से प्रहार किया। पवन देव और इंद्र आदि शक्तियों में बड़ी ठनी।
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पवन पुत्र स्वस्थ तो हो गए पर वज्र की चोट से उनकी ठोड़ी हमेशा के लिए टेढ़ी हो गई। इस टेढ़ी हुई ठोड़ी के कारण बजरंग बली का नाम हनुमान पड़ा।

हनुमान को प्रसन्न करने का प्रमुख उपाय है कि घर में रोज राम नाम का गुणगान करते रहा जाए। राम की आराधना करने वालों के लिए हनुमान सदैव तत्पर रहते हैं। एक और प्रसंग के अनुसार इन्होंने सभी नौ ग्रहों को रावण से मुक्त कराया था।

शनि सहित सभी ग्रहों का वरदान है कि हनुमान भक्त प्राणी को ग्रहों के दोष-मारकेश अथवा मरणतुल्य कष्ट देने वाले ग्रहों की दशादि का दोष नहीं लगेगा। इनकी आराधना करते रहने पर सभी अशुभग्रह शुभफल देने को विवश हो जाते हैं।
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हनुमान के ध्यान में तेज, धृति, यश, चतुरता, शक्ति, विनय, नीति, पुरुषार्थ, उत्तम बुद्धि, शूरता, दक्षता, बल, धैर्य और पराक्रम हमेशा विद्यमान रहते हैं। अतः इनके स्मरण से मनुष्य में बुद्धि, बल, यश, धैर्य निर्भयता,आरोग्यता, विवेक और वाक्पटुता आदि गुण आ जाते हैं।

प्रसन्न होने पर ये आठों सिद्धियों, अणिमा, महिमा, गरिमा, लघिमा, प्राप्ति, प्राकाम्य, ईशित्व और वशित्व और नौ निधियां कुछ भी दे सकते हैं। इनका मंत्र- ऊँ हनुमते नम: अथवा अष्टादश मंत्र 'ॐ भगवते आन्जनेयाय महाबलाय स्वाहा' का जप करने से दैहिक, दैविक और भौतिक तापों से मुक्ति मिलती है।

साथ ही घर दफ्तर दुकान में नित्य  आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा, भूत-प्रेत बाधा, मरण, मोहन, उच्चाटन, स्तम्भन, विद्वेषण आदि से पूर्णतः मुक्ति मिल जाती है।
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