दीपावली के एक दिन पहले यानी कार्तिक कृष्ण चतुदर्शी तिथि को छोटी दीपावली के नाम से जाना जाता है। इस तिथि को शास्त्रों में नरक चतुर्दशी बताया गया है। इस दिन प्रातः काल स्नान करके यम तर्पण एवं शाम के समय दीप दान का बड़ा महत्व है। माना जाता है कि इससे मृत्यु के बाद यम का भय नहीं रहता है।
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पुराणों में नरक चतुर्दशी को लेकर एक बड़ी ही रोचक कथा है। नरकासुर नामक एक असुर ने 16 हजार कन्याओं को बंदी बनाकर रखा था। भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर का वध करके इन कन्याओं को बंधन मुक्त करवाया।
नरकासुर के बंदीगृह से मुक्त होने के बाद इन कन्याओं ने श्री कृष्ण से कहा कि समाज उन्हें स्वीकार नहीं करेगा अतः आप ही कोई उपाय करें जिससे समाज में हमारा सम्मान बना रहे। समाज में इन कन्याओं को सम्मान दिलाने के लिए सत्यभामा के सहयोग से श्री कृष्ण ने सभी कन्याओं से विवाह कर लिया।
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नरकासुर का वध और 16 हजार कन्याओं के बंधन मुक्त होने के उपलक्ष्य में नरक चतुर्दशी के दिन दीपदान की परंपरा शुरू हुई।