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हनुमान जयंती विशेषः कहां मिले थे हनुमान जी अपने बेटे से

Tue, 15 Apr 2014 09:57 AM IST
अमर उजाला, दिल्ली / टीम डिजिटल
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हनुमान जी का विवाह भी हुआ था और उनका एक बेटा भी था। हनुमान जी अपने बेटे से कहां और कब मिले थे इस बात का गवाह है यह मंदिर
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एक मत के अनुसार महावीर हनुमान जी का जन्म वैशाख पूर्णिमा के दिन हुआ था। हनुमान जी ने अपना पूरा जीवन राम की भक्ति में समर्पित कर दिया। भक्ति भाव में डूबे हनुमान जी को पता ही नहीं चला कि उनका एक बेटा भी है।

इस बात का पता हनुमान जी को तब चला जब रावण के भाई अहिरावण ने राम और लक्ष्मण जी का अपहरण कर लिया। अहिरावण से राम लक्ष्मण को मुक्त करवाने के लिए हनुमान जी जब पाताल में प्रवेश कर रहे थे उस समय हनुमान जी पहली बार अपने पुत्र मकरध्वज से मिले।
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वह स्थान जहां हनुमान और मकरध्वज पहली बार मिले थे वह स्थान द्वारिका पुरी के पास स्थित बेट द्वारिका माना जाता है। इस मिलन के प्रतीक के तौर पर यहां हनुमान जी के साथ उनके पुत्र मकरध्वज की भी प्रतिमा विराजमान है।

कथा है कि पाताल के प्रहरी के तौर पर काम कर रहे मकरध्वज ने हनुमान जी को पाताल में प्रवेश करने से रोक दिया। इसके बाद हनुमान जी का मकरध्वज से लंबे समय तक युद्घ चला।

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जब हनुमान जी ने मकरध्वज को परास्त कर दिया तो आधा शरीर वानर और आधा शरीर मछली वाले मकरध्वज से पूछा कि तुम्हारा शरीर ऐसा क्यों है और तुम्हारे पिता कौन हैं।
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मकरध्वज ने उत्तर दिया कि मेरे पिता महावीर हनुमान हैं और मेरी माता एक मछली है। लंका दहन के बाद जब हनुमान जी अपनी पूंछ में लगी आग सागर में बुझा रहे थे।

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उस समय हनुमान जी के शरीर से टपके पसीने की बूंद को मेरी माता ने अपनी मुख में रख लिया। इससे मेरा जन्म हुआ। मकरध्वज के उत्तर को सुनकर हनुमान जी खुश हो गए और मकरध्वज को पुत्र कहकर गले लगा लिया।
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