फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Ganga Dussehra 2021: गंगाजल को क्यों माना जाता है इतना पवित्र, जानिए इससे जुड़ी खास बातें

Tue, 15 Jun 2021 10:19 AM IST
Shashi Shashi धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

  • इस बार गंगा दशहरा 20 जून 2021 को मनाया जाएगा।
  • इस दिन गंगा स्नान और मां गंगा की पूजा करने का विशेष महत्व होता है।
  • गंगा नदी में स्नान करने के साथ ही गंगाजल का प्रयोग हर शुभ कार्य में किया जाता है।
  • गंगा दशहरा के पावन पर्व पर जानिए गंगाजल से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें।
 
 
विज्ञापन
गंगा दशहरा 2021 जानिए गंगाजल का महत्व(प्रतीकात्मक तस्वीर)
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

प्रत्येक वर्ष ज्येष्ठ मास की दशमी तिथि को गंगा दशहरा या गंगा जयंती के रूप में मनाया जाता है। पौराणिक धार्मिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार इसी दिन मां गंगा धरती पर अवतरित हुई थी। इस बार गंगा दशहरा 20 जून 2021 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। इस दिन मां गंगा की पूजा आराधना की जाती है साथ ही में इस दिन गंगा स्नान का भी विशेष महत्व होता है। हिंदू धर्म में गंगा नदी को बहुत ही पवित्र और पूजनीय माना गया है। गंगा स्नान के अलावा प्रत्येक शुभ कार्य में भी गंगाजल का प्रयोग किया जाता है। लोग अपने घरों में गंगाजल भरकर रखते हैं। यह बहुत ही पवित्र माना जाता है। आइए गंगा दशहरा के पावन पर्व पर जानते हैं कि गंगाजल को क्यों माना जाता है इतना पवित्र, क्या हैं इससे जुड़ी खास बातें।

विज्ञापन

गंगा दशहरा 2021 गंगाजल को क्यों माना जाता है इतना पवित्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)
गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर आती हैं इसलिए गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना गया है।
 
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार भागीरथ गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाए थे इसलिए गंगा को स्वर्ग की नदी माना गया है। यही कारण है कि गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना जाता है।
 
पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा एक ऐसी नदी है, जिसमें स्वयं देवी-देवताओं ने स्नान किया है, इसलिए गंगा के जल को बहुत पवित्र माना जाता है।
 
विज्ञापन

(प्रतीकात्मक तस्वीर)
गंगा का प्रादुर्भाव भगवान श्री हरि के चरणामृत से हुआ है इसलिए गंगा को बहुत ही पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में भगवान विष्णु के चरण कमल गंगा में ही पड़े थे।
 
गंगा नदी को पापमोचनी और मोक्षदायिनी कहा गया है। भागीरथ के पूर्वजों को मुक्ति गंगाजल के स्पर्श से ही हुई थी। मान्यता है कि यदि मृत्यु के समय व्यक्ति के मुंह में गंगाजल डाल दिया जाए तो उसके पापकर्म नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।

गंगाजल कभी अशुद्ध नहीं होता है और न ही यह कभी सड़ता है। लोग गंगाजल को सालों तक अपने घर में रखते हैं लेकिन इसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते हैं। गंगाजल को कितने भी दिन रखकर प्रयोग में लाया जा सकता है यह कभी वासी नहीं होता है।
 
समुद्र मंथन के समय जिन स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी उनमें से गंगा ही एक ऐसी नदी है जिसमें दो स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी। एक प्रयागराज और दूसरा स्थान है हरिद्वार। अमृत की बूंदें गिरने के कारण गंगाजल को अमृत तुल्य माना जाता है।
 
 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें