गंगा दशहरा 2021 गंगाजल को क्यों माना जाता है इतना पवित्र (प्रतीकात्मक तस्वीर)
गंगा भगवान शिव की जटाओं से निकलकर पृथ्वी पर आती हैं इसलिए गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना गया है।
पौराणिक ग्रंथों में मिलने वाली कथाओं के अनुसार भागीरथ गंगा को स्वर्ग से धरती पर लाए थे इसलिए गंगा को स्वर्ग की नदी माना गया है। यही कारण है कि गंगाजल को बहुत ही पवित्र माना जाता है।
पौराणिक कथाओं के अनुसार गंगा एक ऐसी नदी है, जिसमें स्वयं देवी-देवताओं ने स्नान किया है, इसलिए गंगा के जल को बहुत पवित्र माना जाता है।
गंगा का प्रादुर्भाव भगवान श्री हरि के चरणामृत से हुआ है इसलिए गंगा को बहुत ही पवित्र माना जाता है। हरिद्वार में भगवान विष्णु के चरण कमल गंगा में ही पड़े थे।
गंगा नदी को पापमोचनी और मोक्षदायिनी कहा गया है। भागीरथ के पूर्वजों को मुक्ति गंगाजल के स्पर्श से ही हुई थी। मान्यता है कि यदि मृत्यु के समय व्यक्ति के मुंह में गंगाजल डाल दिया जाए तो उसके पापकर्म नष्ट हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है।
गंगाजल कभी अशुद्ध नहीं होता है और न ही यह कभी सड़ता है। लोग गंगाजल को सालों तक अपने घर में रखते हैं लेकिन इसमें कभी कीड़े नहीं पड़ते हैं। गंगाजल को कितने भी दिन रखकर प्रयोग में लाया जा सकता है यह कभी वासी नहीं होता है।
समुद्र मंथन के समय जिन स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी उनमें से गंगा ही एक ऐसी नदी है जिसमें दो स्थानों पर अमृत की बूंदें गिरी। एक प्रयागराज और दूसरा स्थान है हरिद्वार। अमृत की बूंदें गिरने के कारण गंगाजल को अमृत तुल्य माना जाता है।