लक्ष्मी को चंचला भी कहते हैं क्योंकि यह एक स्थान पर टिक कर नहीं रहती हैं। लक्ष्मी की एक बड़ी विशेषता यह है कि यह जितनी कठिनता से प्रसन्न होता है उतनी ही सरलता से रूष्ट हो जाती है। कहने का तात्पर्य यह है कि लक्ष्मी की कृपा प्राप्ति बनाए रखने के लिए सदैव शास्त्रों में बताए गये नियमों का पालन करना चाहिए अन्यथा एक छोटी सी गलती से लक्ष्मी रूष्ट होकर चली जाती है। आपने देखा भी होगा कि बड़े ठाठ बाठ से रहने वाले साहूकार और सेठ पल में कंगाल होकर रास्ते पर आ जाते हैं। यह सब मां लक्ष्मी के रूष्ट होने के कारण ही होता है। मां को नाराज करने से अच्छा है कि शास्त्रों में बताये गये इन नियमों का पालन करें।
धन को लक्ष्मी का स्वरूप माना गया है। बहुत से लोग उंगली में थूक लगाकर रूपया गिनते हैं। ऐसा करने से लक्ष्मी का अनादर होता है। किसी से रूपया लेते या देते समय उसे प्रणाम कर लेना चाहिए। इससे माता प्रसन्न होती हैं। रूपया गिनने के लिए वॉटर स्पंज का प्रयोग करना चाहिए।
आधुनिक जीवनशैली में लोग देर से सोते हैं और सुबह देर से उठते हैं। जबकि शास्त्रों में कहा गया है कि बेहतर स्वास्थ्य और समृद्घि के लिए सूर्योदय से पहले जगना चाहिए। इसके पीछे यह कारण माना जाता है कि विष्णु भगवान ही सूर्य हैं। जो लोग सूर्योदय का स्वागत नहीं करते हैं उनसे सूर्य देव नाराज हो जाते हैं। सूर्य के नाराज होने से कई प्रकार के रोग शरीर को पीड़ित करने लगते हैं और जहां रोग होता है वहां लक्ष्मी का वास संभव ही नहीं है।
घर में स्त्री भोजन बनाते समय या खाना परोसते समय खाती रहती है तो लक्ष्मी नाराज हो जाती है। इसका कारण यह है कि इससे भोजन जूठा हो जाता है। जहां जूठा खाया, खिलाया या फैला रहता है उस घर के लोगों से मां लक्ष्मी नाराज रहती हैं। इसलिए स्त्रियों को भोजन बनाते समय श्रद्घा भाव से खाना पकाना और खिलाना चाहिए। कहावत भी है कि जिस भावना से भोजन पकाया जाता है वही भावना भोजन करने वालों में विकसित होती है।
मां लक्ष्मी का कहना है कि जहां गृह लक्ष्मी की हंसी गूंजती है उस घर में मैं गृह लक्ष्मी के रूप में सदैव निवास करती हूं। इसके विपरीत जिस घर में पत्नी का अनादर किया जाता है वहां लक्ष्मी एक पल भी रूकना पसंद नहीं करती हैं। पत्नी का अनादर करने वाला परोक्ष रूप से लक्ष्मी का अपमान करता है। व्यवहारिक जीवन में आपने देखा भी होगा कि जिस घर में पति-पत्नी के बीच बेहतर ताल-मेल होता है उनके घर में सदैव उन्नति होती है।
शास्त्रों में कहा गया है कि दिन में, सूर्योदय के समय और गोधूली के समय ईश्वर का नाम लेना चाहिए। जिस मनुष्य का जो कर्तव्य और कर्म है वह इस समय करना चाहिए। जो व्यक्ति इस समय सोता है, मैथुन करता है उसके घर में लक्ष्मी नहीं रहती हैं। किसी न किसी रूप में धन का नाश होता है और आर्थिक एवं मानसिक परेशानी बनी रहती है।