तीर्थ स्थलों में विख्यात नगरी मणिकर्ण के लोग एक माह तक बाल और नाखून नहीं कटवाएंगे। ऐसा इसलिए किया जाता है कि घाटी के देवी-देवता एक माह के लिए इंद्र सभा को रवाना होते हैं। इस परंपरा को यहां के बाशिंदे बखूबी निभाते आए हैं।
हालांकि सुबह-शाम वाद्य यंत्रों की स्वर लहरियों से घाटी गूंजती रहेगी। धार्मिक नगरी मणिकर्ण में वाद्य यंत्रों की धुनों का दौर एक माह तक चलता रहेगा। फाल्गुन की संक्रांति को देव वाद्य यंत्रों से निकलने वाली स्वर लहरियां बंद होंगी।
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देवी-देवताओं के कार कारिंदे तपस्या में लीन रहेंगे। 21 जनवरी से हर घर का मुखिया बाल और नाखून नहीं कटवाएगा। घर के मुखिया को घर से बाहर निकलने पर भी पूर्ण देव प्रतिबंध रहेगा।
माता कैलाशना के कारदार हुकम राम ने बताया कि पुरानी देव परंपराओं को इस महीने कारकूनों को विशेष रूप से निभाना पड़ता है।