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dusshera 2021: लक्ष्मण ने लिया रावण से ज्ञान, जानिए क्या हैं वे बहुमूल्य सीख

Tue, 12 Oct 2021 06:32 PM IST
शशि सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला
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दशहरा 2021 (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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अश्विन मास में शुक्ल पक्ष की दशमी तिथि को दशहरा या विजयदशमी के रुप मनाया जाता है। लोग रावण के पुतले का दहन करके बुराई के ऊपर अच्छाई की विजय का पर्व मनाते हैं। इस बार दशहरे का त्योहार 15 अक्टूबर 2021 दिन शुक्रवार को मनाया जाएगा। रावण के बारे में लोगों के मन में एक नकारात्मक पहलू है लेकिन रावण अत्यंत ज्ञानी और प्रकांड पंडित था। रावण ही एकमात्र ऐसा विद्वान था जिसमें त्रिकाल दर्शन की क्षमता थी। भगवान राम ने भी स्वयं रावण के  पराक्रम और ज्ञान की प्रशंसा की थी, क्योंकि वे भी रावण के ज्ञान से भलिभांति परिचित थे। जब रणभूमि में रावण मरणासन्न अवस्था में था तो स्वयं प्रभु श्री राम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान लेने की आज्ञा दी थी, जिसके बाद लक्ष्मण ने दशानन से ज्ञान लिया। रावण के द्वारा दी गई सीख आज के जीवन में भी सार्थक सिद्ध होती है। जानते हैं कि क्या हैं वे बहुमूल्य सीख।

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जब युद्ध भूमि में रावण मृत्यु शैय्या पर था तब भगवान राम ने लक्ष्मण को रावण से ज्ञान लेने की आज्ञा दी। अपने भ्राता की आज्ञानुसार लक्ष्मण दशानन के पास जाकर खड़े हो गए परंतु कुछ समय बाद वापस आ गए और कहा कि रावण रावण ने उनसे कुछ नहीं कहा, लक्ष्मण की बात सुनकर प्रभु राम सारा वृतान्त समझ गए। तब उन्होंने अपने अनुज (छोटे भाई) को समझाते हुए कहा कि रावण एक महाज्ञानी और प्रकांड पंडित है और जब हम किसी से ज्ञान लेते हैं तो उसको सम्मान देते हैं इसलिए इसबार रावण के सिर की ओर नहीं पैरों की ओर खड़ो होकर विनम्रतापूर्वक निवेदन करते हुए सीख लेना। इसके बाद लक्ष्मण जी भगवान राम की बात मानकर गए और विनम्रतापूर्वक रावण से ज्ञान लिया। तब रावण में अपने ज्ञान और जीवन के अनुभव के आधार पर लक्ष्मण को बहुमूल्य बातें बताई।

शुभ कार्यों में न करें देरी 
रावण ने पहली महत्वपूर्ण बात बताते हुए कहा कि अपने जीवन में शुभ कार्य करने में कभी देरी नहीं करनी चाहिए। जितना जल्दी हो सके शुभ कार्यों को कर लेना चाहिए। इसी तरह से यदि आपको अशुभ कार्यों के बारे में भान है तो उसे जितना हो सके टालने के प्रयास करने चाहिए। तब रावण ने इस प्रकार से बताया कि वह भगवान राम को समय रहते नहीं पहचान पाया जो स्वयं श्री हरि विष्णु के अवतार हैं। उनकी शरण में जाने से बिलंब करने के कारण ही आज वह रणक्षेत्र में मरणासन्न अवस्था में है।
 
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किसी को न बताएं गोपनीय बात
दशानन ने दूसरी महत्वपूर्ण बात बताते हुए लक्ष्मण से कहा कि अपने जीवन में यदि कोई गोपनीय बात या भेद हो तो उसे किसी के सामने भी प्रकट नहीं करना चाहिए। विभीषण को अपनी मृत्यु के गोपनीय रहस्य विषय में बताने के कारण ही आज वह मृत्यु की शैय्या पर है। ग्रंथों से मिलने वाली जानकारी के अनुसार विभीषण ने ही राम जी को बताया था कि रावण की मृत्यु तभी संभव है जो उसकी नाभि पर प्रहार किया जाए। 

प्रतिद्वंदी को न समझे छोटा
तीसरी महत्वपूर्ण बात बताते हुए रावण ने कहा कि आपका प्रतिद्वंदी चाहे कैसा भी या कितना भी कमजोर क्यों न हो उसे कभी तुच्छ समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। यही त्रुटि अपने जीवन में की और राम को साधारण व कमजोर समझा। 
 
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