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Dussehra 2021:आखिर क्यों श्रीराम को भी रावण को मारने के लिए लेनी पड़ी थी विभीषण की मदद

Thu, 14 Oct 2021 05:37 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

श्रीराम ने रावण का वध ज़रूर किया था लेकिन रावण को मारने में प्रभु को भी विभीषण की मदद लेनी पड़ी थी। आखिर क्या थी वजह आइये जानते हैं।
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रावण को हराना मुश्किल क्यों था - फोटो : istock
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विस्तार
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अश्विन मास के शुक्ल पक्ष कि दशमी को विजयादशमी या दशहरा का पर्व मनाया जाता है। इस वर्ष दशहरा 15 अक्टूबर को मनाया जा रहा है। श्रीराम ने विजयदशमी यानि दशहरा के दिन रावण का वध करके विजय प्राप्त की थी। लेकिन रावण को मारना इतना आसान नहीं था। हालांकि रावण अमर तो नहीं था,लेकिन उसे मारना भी असंभव था। यहां तक कि श्रीराम को रावण का वध करने के लिए विभीषण की मदद लेनी पड़ी थी। आखिर क्या कारण था कि रावण को मारने में श्रीराम कि मदद विभीषण ने करी। चलिए  जानते हैं ऐसा क्या था रावण के पास जो उसे सर्वशक्तिशाली बनाता था।

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ravana
क्यों था रावण को मारना असंभव 
रावण एक सिद्ध ब्राह्मण था और परम तपस्वी. उसने अपनी तपस्या से कई वरदान प्राप्त किए थे। हालांकि रावण अमर तो नहीं था,लेकिन उसे मारना भी असंभव था. इसका कारण था अमृत कलश। रावण ने अमृत कलश अपनी नाभि में छिपा कर रखा था।

दशहरा 2021 - फोटो : Istock
रावण ने कैसे प्राप्त किया अमृत कलश
पुराणों के अनुसार रावण अमृत कलश प्राप्त करने के लिए अपने भाईयों कुंभकर्ण और विभीषण के साथ गोकुंड नाम के आश्रम में तपस्या के लिए गया था। उसने ब्रह्मदेव को प्रसन्न करने के लिए कठोर तप किया था। उसके लिए उसने दस हजार वर्षों तक तपस्या की थी। वह एक हजार वर्ष पूरा होने के बाद अपना एक सिर हवन कुंड में अर्पित कर देता था। इस प्रकार नौ हजार वर्ष पूर्ण होने के बाद वह अपने नौ सिरों को हवन कुंड में चढ़ा चुका था। जब दस हजार वर्ष पूर्ण होने वाले थे तो रावण अपना दसवां सिर भी हवन कुंड में चढ़ाने लगा,लेकिन उसी समय ब्रह्मा जी  प्रकट हो गए और रावण की तपस्या से प्रसन्न होकर वर मांगने को कहा ।

रावण
रावण ने मांगा अमृत्व का वरदान
रावण ने ब्रह्म देव से अमृत्व का वरदान मांगा। ब्रह्मा जी ने रावण से कहा कि ऐसा संभव नही है, जो भी इस पृथ्वी पर आया है उसे तो जाना ही पड़ेगा। तब रावण ने यह वर मांगा की मनुष्य जाति को छोड़कर और कोई भी उसका वध न कर सके। ब्रह्मा जी ने रावण को वरदान देते हुए उसके कटे हुए नौ सिर भी वापस कर दिए। ये वरदान ऐसा ही बना रहे इसीलिए ब्रह्मा जी ने रावण की नाभि में अमृत कुंड  स्थापित कर दिया। अब रावण की मृत्यु तभी संभव थी जब उस कलश का अमृत सूख जाता।
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राम-रावण युद्ध - फोटो : istock
श्रीराम ने ऐसे किया रावण का वध 
जब प्रभु श्रीराम और रावण के बीच युद्ध हो रहा था तब उसे मारने में बहुत समस्या हो रही थी। तभी विभीषण ने श्रीराम को संकेत दिया कि वह रावण कि नाभि में तीर मारें क्यूंकि वहां रावण ने अमृत कलश छिपा रखा है। इतना कहते ही श्रीराम ने तीर चला दिया और रावण मारा गया।
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