दीपावली का गुप्त अर्थ - भगवान कृष्ण ने राक्षस नरकासुर का वध किया और लोगों को काम, वासना, अनैतिकता और बुरी प्रवृत्तियों से मुक्त किया और उन्हें प्रभु विचार (दिव्य विचार) देकर उन्हें सुखी किया। यह दीपावली हम वर्षों से एक परंपरा के रूप में मना रहे हैं। आज उसका अर्थ लुप्त हो गया है। इस गुप्त अर्थ को ध्यान में रखते हुए यदि इससे अस्मिता जागृत हो जाए तो अज्ञानी अन्धकार का, साथ ही भोग और अनैतिक, आसुरी प्रवृत्ति कम हो जाएगा। दीपावली के अवसर पर जीव द्वारा किए गए धर्माचरण और साधना के कारण जीव का आत्मा से अनुसंधान जुड़कर आत्मतेज प्रकट होगा। इस आत्मतेज के कारण ही जीव को आत्मानंद की अनुभूति आती है।
हिंदू संस्कृति के पदचिन्ह - विदेशों में प्राचीन हिंदू संस्कृति का अस्तित्व न केवल त्योहारों के अवसर पर देखा जा सकता है, बल्कि प्राचीन मंदिरों और रीति-रिवाजों में भी देखा जा सकता है। यह इस बात को रेखांकित करता है कि अन्य संप्रदायों के उदय से पहले सनातन वैदिक हिंदू धर्म ही एकमात्र धर्म था। महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय की ओर से सद्गुरु (श्रीमती) अंजलि गाडगिल सहित चार व्यक्तियों ने दक्षिण पूर्व एशिया का भ्रमण व अध्ययन किया। इस भ्रमण के दौरान उन्हें विदेशों में प्राचीन हिंदू संस्कृति के पदचिन्ह देखने को मिले।
इंडोनेशिया- हालांकि इंडोनेशिया एक द्वीप समूह और मुस्लिम बहुल राष्ट्र है, लेकिन महान हिंदू संस्कृति ने वहां गहरी जड़ें जमा रखी हैं। भारत से 4,000 किमी दूर इंडोनेशियाई द्वीप पर हिंदू संस्कृति पहले से मौजूद थी, इसका एक उदाहरण पेट्रोल पंप पर द्वारपाल के रूप में स्थापित श्री गणेश की मूर्ति है! 15वीं शताब्दी तक इंडोनेशिया में हिंदू राजाओं का शासन था। जावा द्वीप कई सदियों से रामायण की घटनाओं पर आधारित अपने नृत्य नाटक के लिए प्रसिद्ध है। योग्यकर्ता शहर से 17 किमी की दूरी पर 'प्रंबनन' नाम का एक गांव है। यहां मंदिरों का एक समूह है जिसे 'चंडी प्रबंनन' कहा जाता है। 'चंडी' का अर्थ है मंदिर और 'प्रबंनन का अर्थ है परब्रह्मण'। इसका अर्थ है 'परब्रह्म मंदिर समूह'। कभी दुनिया के सबसे ऊंचे मंदिर रहे इस मंदिर में हजारों की संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक आते हैं। इस मंदिर के भव्य परिसर में प्रतिदिन शाम 7 बजे से रात 9 बजे तक रामायण की घटनाओं पर आधारित नृत्य नाटिका का प्रदर्शन किया जाता है।