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Chhath Puja 2021: छठ पूजा आज, जानिए पूजा सामग्री,पूजा विधि और उदयगामी सूर्य को अर्घ्य देने का समय

Thu, 11 Nov 2021 06:34 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमरउजाला

सार

प्रत्येक वर्ष लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। आज यानि 10 नवंबर को इस बार षष्ठी पड़ रही है। हालांकि पर्व का आरंभ चतुर्थी तिथि से हो जाता है लेकिन षष्ठी को मुख्य पूजा मानी जाती है। इस पर्व में 36 घंटे निर्जला व्रत रख सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है। 
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छठ पर्व - फोटो : self
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विस्तार
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प्रत्येक वर्ष लोक आस्था का महापर्व छठ कार्तिक शुक्ल षष्ठी को मनाया जाता है। छठ पर्व की शुरुआत 8 नवंबर को नहाए-खाय के साथ हुई थी। 9  नवंबर को छठ पर्व का दूसरा दिन खरना मनाया गया। 10 नवंबर को डूबते सूर्य को पहला अर्घ्य दिया गया और  आज यानि 11 नवंबर यानी को उगते सूर्य को अर्घ्य के साथ छठ पर्व संपन्न होगा। इस पर्व में 36 घंटे निर्जला व्रत रख सूर्य देव और छठी मैया की पूजा की जाती है और उन्हें अर्घ्य दिया जाता है।  कहते हैं जो लोग संतान सुख से वंचित हैं उनके लिए ये व्रत वरदान साबित होता है। आइए जानते हैं छठ पर्व की पूजा विधि, सामग्री, और अर्घ्य देने का समय 

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संध्या अर्घ्य और प्रात:काल के अर्घ्य का समय

10 नवंबर (संध्या अर्घ्य) सूर्यास्त का समय : सायं 05:30 बजे 
11 नवंबर (प्रात:काल अर्घ्य) सूर्योदय का समय : प्रातः 06:41

छठ पूजा 2021 - फोटो : Self
छठ पूजा सामग्री 

छठ पूजा के दौरान निम्न पूजा सामग्री होनी चाहिए-
  • नए वस्त्र
  •  बांस की दो बड़ी टोकरी या सूप
  •  थाली
  • पत्ते लगे गन्ने
  •  बांस या फिर पीतल के सूप
  •  दूध 
  • जल
  •  गिलास 
  • चावल
  •  सिंदूर 
  • दीपक
  • धूप 
  • कलश,
  • पानी वाला नारियल 
  • अदरक का हरा पौधा 
  • नाशपाती
  •  शकरकंदी
  •  हल्दी 
  • मूली 
  • मीठा नींबू 
  • शरीफा 
  • केला
  • कुमकुम 
  • चंदन
  •  सुथनी 
  • पान 
  • सुपारी 
  • शहद 
  • अगरबत्ती 
  • धूप बत्ती 
  • कपूर 
  • मिठाई 
  • गुड़ 
  • चावल का आटा 
  • गेहूं
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छठ पूजा 2021 - फोटो : अमर उजाला
छठ पूजा विधि
  • छठ पर्व के दिन प्रात:काल स्नानादि के बाद संकल्प लें। संकल्प लेते समय इस मन्त्र का उच्चारण किया जाता है-ॐ अद्य अमुक गोत्रो अमुक नामाहं मम सर्व पापनक्षयपूर्वक शरीरारोग्यार्थ श्री सूर्यनारायणदेवप्रसन्नार्थ श्री सूर्यषष्ठीव्रत करिष्ये।
  • पूरे दिन निराहार और निर्जला व्रत रखा जाता है। फिर शाम के समय नदी या तालाब में जाकर स्नान किया जाता है और सूर्यदेव को अर्घ्य दिया जाता है।
  • अर्घ्य देने के लिए बांस की तीन बड़ी टोकरी या बांस या पीतल के तीन सूप लें। इनमें चावल, दीपक, लाल सिंदूर, गन्ना, हल्दी, सुथनी, सब्जी और शकरकंदी रखें।
  • साथ में थाली, दूध और गिलास ले लें।
  • फलों में नाशपाती, शहद, पान, बड़ा नींबू, सुपारी, कैराव, कपूर, मिठाई और चंदन रखें। इसमें ठेकुआ, मालपुआ, खीर, सूजी का हलवा, पूरी, चावल से बने लड्डू भी रखें। सभी सामग्रियां टोकरी में सजा लें।
  • सूर्य को अर्घ्य देते समय सारा प्रसाद सूप में रखें और सूप में एक दीपक भी जला लें। इसके बाद नदी में उतर कर सूर्य देव को अर्घ्य दें। अर्घ्य देते समय इस मंत्र का उच्चारण करें। ऊं एहि सूर्य सहस्त्रांशों तेजोराशे जगत्पते।अनुकम्पया मां भवत्या गृहाणार्ध्य नमोअस्तुते॥
 
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