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भय को भगाए भैरव : इस उपाय से दूर होंगे राहु के रोड़े और केतु के कष्ट

Sun, 17 Mar 2019 11:24 AM IST
Madhukar Mishra धर्म डेस्क, अमर उजाला
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Bhairv Puja
कालभैरव को भगवान शिव की क्रोधाग्नि का विग्रह रूप माना जाता है। इन्हें शिव का पांचवा अवतार माना गया है। इनके दो रूप है पहला बटुक भैरव जो भक्तों को अभय देने वाले सौम्य रूप में प्रसिद्ध है। वहीं भैरव का दूसरा स्वरूप अपराधिक प्रवृतियों पर नियंत्रण करने वाले भयंकर दंडनायक का है। भगवान भैरव के साधक या उसके परिवार पर किसी भी प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा, जादू-टोने तथा भूत-प्रेत आदि का असर नहीं होता है।
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कालभैरव बाबा का किया गया श्रृंगार - फोटो : amar ujala
काशी के कोतवाल के नाम से जाने जाने वाले भगवान भैरव अपने भक्त की रक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। पृथ्वी पर मौजूद देवी के 51 शक्तिपीठ की रक्षा भी कालभैरव अपने 52 विभिन्न रूपों में करते हैं। किसी भी शक्तिपीठ के दर्शन भगवान भैरव के बगैर अधूरे माने गए हैं। भैरव की साधना करने वाला साधक सभी प्रकार के भय से मुक्त रहता है। 

भैरव को प्रसन्न करने के सरल-सहज उपाय जानने के लिए आगे की स्लाइड क्लिक करें — 
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काल भैरव जयंती
कालभैरव को शनि का अधिपति देव माना गया है। ऐसे में शनि के दुष्प्रभाव को दूर करने और राहु-केतु से मिलने वाली पीड़ा को दूर करने के लिए भैरव उपासना से बड़ा कोई उपाय नहीं है। भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए उड़द की दाल या इससे निर्मित मिष्ठान,दूध-मेवा का भोग लगाएं। 

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भगवान भैरव को चमेली का पुष्प अतिप्रिय है, इसलिए भैरव को मनाने के लिए, उनकी कृपा पाने के लिए इस पुष्प का विशेष रूप से प्रयोग करें। 
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भगवान भैरव जी की कृपा पाने के लिए उनके 108 नाम का एक माला जप प्रतिदिन करें। इस प्रभावी उपाय से साधक के सभी भय दूर और समस्याओं का समाधान निकल आता है।
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भगवान भैरव को प्रसन्न करने के लिए प्रतिदिन भैरव चालीसा का पाठ करें। इस उपाय से बड़े से बड़े कष्ट से मुक्ति मिल जाती है। श्रद्धा भाव से इस उपाय को करने पर कोर्ट कचहरी आदि विवादों में विजय मिलती है। 
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