ईसा मसीह एक दिन सुबह-सुबह नगर से बाहर निकले। रास्ते में एक झील के किनारे उन्होंने एक मछुआरे को मछलियां पकड़ते देखा। मछुआरा मछलियां फंसने का इंतजार कर रहा था। ईसा ने उसके कंधे पर हाथ रखा और पूछा, भाई, कब तक मछलियां मारते रहोगे?
मछुआरे ने पलटकर देखा। ईसा की आंखें उसे झील से भी गहरी लग रही थीं। उसने सोचा कि नदी में पड़े जाल को छोड़कर इन आंखों में ही खुद को डुबा दूं। उसे लगा कि जो व्यक्ति सामने खड़ा है, वह कोई दिव्यपुरुष है। न जाने क्या हुआ कि उसने जाल वहीं छोड़ दिया और ईसा के साथ हो लिया। उसने ईसा से कहा, मैं आपके साथ चलूंगा। यदि मछलियां पकड़ने से भी बड़ा कोई काम मेरे लिए है, तो मैं वह करूंगा।
पढ़ें,इन 7 बातों से जानिए ईसा मसीह की मौत का रहस्य
ईसा ने कहा, तुम जरूरतमंदों के लिए काम करो। ऐसे दुखियारे और वंचित लोगों की दुनिया में कमी नहीं है, जिन्हें सेवा-सहायता की जरूरत है। उस व्यक्ति ने हामी भरी और वह ईसा के साथ चल पड़ा। दोनों कुछ दूर ही आगे बढ़े थे कि मछुआरे का एक परिचित दौड़ता आया और पूछा, अरे, तुम कहां जा रहे हो? तुम्हारे बीमार पिता की मृत्यु हो गई है। तुम्हें ही उनके कफन-दफन का इंतजाम करना है! चलो मेरे साथ!
पढ़ें, इन देवी देवताओं के मंदिर को देखकर चकरा जाएंगे
मछुआरे ने ईसा से पूछा, यदि आप अनुमति दें, तो मैं पिता का अंतिम संस्कार करने के बाद आपके पास आ जाऊं? ईसा ने कहा, तुम्हारी इच्छा है। वैसे कई लोग हैं, जो तुमसे जीवन की उम्मीद करते हैं। जो अब इस संसार में नहीं हैं, उनका अंतिम कर्म करने वाले तो बहुत होंगे। तुम्हारी जरूरत कहीं और है।