अपने पिता की मृत्यु से दुखी एक युवक बुद्ध के पास इस आशा से गया कि बुद्ध का धर्म अधिक गहन है। वह उसके पिता की आत्मा को मुक्त कराने के लिए कोई महत्वपूर्ण क्रिया जरूर करेंगे। बुद्ध ने युवक की बात सुनकर उसे दो कलश लाने के लिए कहा। वह ले आया, तो बुद्ध ने एक में पिता की अस्थियां और दूसरे में पत्थर भर लाने के लिए कहा।
युवक ने इतना काम कर लिया, तो बुद्ध ने दोनों कलश को नदी में इस तरह रख देने के लिए कहा कि वे पानी में मुहाने तक डूब जाएं। फिर बुद्ध ने युवक से कहा कि वह पुरोहितों के मंत्र पढ़ने के दौरान दोनों कलश को पानी के भीतर हथौड़ी से ठोक दे और वापस आकर सारा वृत्तांत सुनाए।
पढ़ें, साप्ताहिक राशिफलः 29 सितंबर से 5 अक्तूबर तक
उपरोक्त क्रिया करने के बाद युवक अत्यंत उत्साह में था। बुद्ध के पास लौटकर उसने सारा विवरण कह सुनाया, दोनों कलश पानी के भीतर ठोकने पर टूट गए। उनके भीतर मौजूद पत्थर तो पानी में डूब गए, लेकिन घी ऊपर आ गया और नदी में दूर तक बह गया।
बुद्ध ने कहा, अब तुम जाकर पुरोहितों से कहो कि वे प्रार्थना करें कि पत्थर पानी के ऊपर आकर तैरने लगें और घी डूब जाए।
पढ़ें,नवरात्र के पांचवें दिन स्कंदमाता की पूजा का रहस्य
यह सुनकर युवक चकित रह गया और बुद्ध से बोला, आप कैसी बात करते हैं? पुरोहित कितनी ही प्रार्थना क्यों न कर लें, पर पत्थर पानी पर कभी नहीं तैरेंगे और घी कभी नहीं डूबेगा!
बुद्ध ने कहा, तुम्हारे पिता के साथ भी ऐसा ही होगा। यदि उन्होंने अपने जीवन में शुभ और सत्कर्म किए होंगे, तो उनकी आत्मा स्वर्ग को प्राप्त होगी। यदि उन्होंने त्याज्य और स्वार्थपूर्ण कर्म किए होंगे, तो उनकी आत्मा नर्क में जाएगी। सृष्टि में ऐसा कोई भी पुरोहित या कर्मकांड नहीं है, जो तुम्हारे पिता के कर्मफलों में तिल भर का भी हेरफेर कर सके।