राजा किसी बात पर अपने वजीर से नाराज हो गया, और उसने उसे एक ऊंची मीनार के ऊपर कैद कर दिया। चुनौती भी दी कि वहां से उतर कर दिखाए। लोगों ने देखा कि वहां ले जाते वक्त वजीर जरा भी चिंतित नहीं था। उसकी पत्नी ने रोते हुए उससे पूछा कि अब उसे क्या करना चाहिए। वजीर बोला, रेशम का एक बहुत पतला सूत मेरे पास पहुंचाना। मैं कैद से आजाद हो जाऊंगा।
उसकी पत्नी ने बहुत सोचा, पर मीनार पर रेशम का पतला धागा पहुंचाने का उपाय नहीं सूझा। उसने एक होशियार फकीर को समस्या बताई। फकीर ने जो उपाय बताया उसके अनुसार वह एक भृंगी नामक कीड़ा पकड़ कर लाई। उसके पैर में रेशम का धागा बांधा और उसकी मूंछों के बालों पर शहद की एक बूंद रख दी। फिर उसका मुंह चोटी की ओर करके मीनार पर छोड़ दिया।
वह कीड़ा मधु की गंध पाकर, उसे पाने के लोभ में, धीरे-धीरे ऊपर चढ़ने लगा और आखिर उसने अपनी यात्रा पूरी कर ली। रेशम के धागे का एक छोर वजीर के हाथ में पहुंच गया। रेशम के धागे से सूत का धागा, फिर सूत के धागे से डोरी और डोरी से मोटा रस्सा बांधकर ऊपर पहुंचाया गया।
उस रस्से के सहारे वजीर कैद से बाहर हो गया। गुरुदेव कहा करते थे कि सामान्य-सी आस कीड़े से भी अगम्य दूरियां तय करा लेती है। फिर मनुष्य क्या है? आस हो, तो वह सूर्य तक पहुंच सकता है। वहां पहुंचने के लिए प्रकाश की एक किरण ही काफी है।