सीता नवमी तिथि और मुहूर्त
वैशाख शुक्ल नवमी तिथि का प्रारंभ: 05 मई, प्रातः 07:35 बजे पर
वैशाख शुक्ल नवमी तिथि का समापन: 06 मई, प्रातः 08:38 बजे पर
ऐसे में उदया तिथि को देखते हुए सीता नवमी 05 मई को मनाई जा रही है।
सीता नवमी पर अपनाएं ये उपाय
- माता सीता को 16 श्रृंगार समर्पित करने से स्त्री जीवन में पूर्णता आती है। इससे नारीत्व की गरिमा बढ़ती है और वैवाहिक जीवन में मधुरता बनी रहती है।
- माता सीता कन्या रूप में पृथ्वी से उत्पन्न हुई थीं। कन्याओं को भोजन कराना, उन्हें आदर देना, यह उनकी कृपा पाने का सबसे सहज मार्ग है।
- ॐ पतिव्रतायै नमः मंत्र का जप मन को एकाग्र करता है और दाम्पत्य जीवन की कठिनाइयों को दूर करता है। साथ ही सीता चालीसा का पाठ आपके मन को शक्ति और शांति दोनों प्रदान करेगा।
- लाल रंग उर्जा, प्रेम और विवाह का प्रतीक है। माता को लाल चुनरी अर्पित करने से विवाह संबंधी रुकावटें दूर होती हैं और अच्छे प्रस्ताव प्राप्त होते हैं।
- हल्दी की गांठें अर्पित करें और सीता नवमी का व्रत रखें। ये उपाय विवाह योग्य कन्याओं के लिए विशेष फलदायक हैं।
- माता सीता धरती से उत्पन्न हुई थीं, इसलिए भूमि पूजन करके माता सीता का आशीर्वाद प्राप्त करें। इससे जीवन की जड़ें मज़बूत बनती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।