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Sheetala Ashtami 2024: आज शीतला सप्तमी पर कर लें ये 5 उपाय, सुख-समृद्धि की नहीं रहेगी कमी

Mon, 01 Apr 2024 07:46 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

इस वर्ष शीतला सप्तमी 1 अप्रैल को मनाई जाएगी। शीतला सप्तमी और अष्टमी के दिन विवाहित स्त्रियां अपने घर की सुख समृद्धि, अपने संतान की निरोगी व लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं।
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Sheetala Ashtami: शीतला अष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ शीतला माता को जल अर्पित करें। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Sheetala Ashtami 2024: होली के आठवें दिन यानी चैत्र मास के कृष्ण पक्ष की अष्टमी तिथि के दिन शीतला अष्टमी का व्रत किया जाता है। बहुत सी जगहों पर इस दिन को बसौड़ा पर्व के नाम से भी जाना जाता है। बसौड़ा अर्थात बासी भोजन। इस नाम के पीछे की वजह यह है कि शीतला अष्टमी के दिन मां शीतला को बासी भोजन का भोग लगाया जाता है। इस वर्ष शीतलाष्टमी 1 अप्रैल को मनाई जाएगी। शीतला अष्टमी के दिन विवाहित स्त्रियां अपने घर की सुख समृद्धि, अपने संतान की निरोगी व लंबी आयु के लिए व्रत रखती हैं। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से बच्चों को चेचक, खसरा और आंखों की बीमारियां आदि नहीं होती है। इसके अलावा शीतला अष्टमी के दिन कुछ धार्मिक उपाय करके आप अपने जीवन में सुख-चैन ला सकते हैं।
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शीतल जल से स्नान
धार्मिक और आयुर्वेद मान्यता के अनुसार हमारी इम्युनिटी पावर को बढ़ाने के लिए इस दिन त्रितापों से मुक्ति दिलाने वाली शीतला माता की पूजा की जाती है।इस दिन सूर्योदय से पूर्व ब्रह्ममुहूर्त में उठकर शीतल जल से स्नान करना चाहिए।अब से ग्रीष्म ऋतु शुरू हो जाती है,वही इस दिन शीतल जल स्न्नान करने से भगवती प्रसन्न होती हैं।

पवित्र जल का छिड़काव करें
शीतला अष्टमी के दिन पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ शीतला माता को जल अर्पित करें। अर्पित करे हुए जल को थोड़ा सा पात्र में एकत्रित करके घर ले आएं और उसे घर के हर कमरे और हर दिशा में छिड़क दें। ध्यान रखें, छिड़कते समय माता शीतला से प्रार्थना करें कि वह आपके और परिवार के सभी सदस्यों के जीवन में सुख-समृद्धि का आशीर्वाद दें। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन में कभी भी सुख-समृद्धि की कमी नहीं होती।
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बासी भोजन अर्पित करें
अष्टमी के दिन बासी भोजन ही देवी को नैवेद्ध के रूप में समर्पित किया जाता है।मान्यता के अनुसार आज भी अष्टमी के दिन कई घरों में चूल्हा नहीं जलाया जाता है और सभी भक्त ख़ुशी-ख़ुशी प्रसाद के रूप में बासी भोजन का ही आनंद लेते हैं।इसके पीछे तर्क यह है कि इस समय से ही बसंत की विदाई होती है और गर्मी शुरू होती है,इसलिए अब यहाँ से आगे हमें बासी भोजन से परहेज करना चाहिए।

मुख्यद्वार पर हल्दी के स्वास्तिक
पूजन करने के बाद माथे पर हल्दी का तिलक व घर के मुख्यद्वार पर सुख-शांति की मंगल कामना हेतु हल्दी के स्वास्तिक बनाए जाते हैं। हल्दी का प्रयोग हमें कई बीमारियों से बचाकर व मन को प्रसन्नता देकर सकारात्मकता को बढ़ाता है। शीतला माता पर चढ़ाए हुए जल से आंखें धोई जाती हैं। यह परंपरा गर्मियों में आंखों का ध्यान रखने की हिदायत का संकेत है।

मंत्र और पाठ करें
मां का पौराणिक मंत्र 'ॐ ह्रीं श्रीं शीतलायै नमः' मनुष्यों को सभी संकटों से मुक्ति प्रदान कर समाज में मान-सम्मान,पद व गरिमा की वृद्धि कराता है। जो भी इस दिन शीतलाष्टक का पाठ करते हैं  मां उन पर अनुग्रह करती हुई उनके घर-परिवार की सभी संकटों से रक्षा करती हैं। 
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