वाल्मीकि रामायण के अनुसार भगवान विष्णु के सातवें अवतार प्रभु श्रीराम का जन्म चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, कर्क लग्न, अभिजीत मुहूर्त और पुनर्वसु नक्षत्र में हुआ था। प्रभु राम के जन्मदिन को राम नवमी के रूप में हर वर्ष देश-विदेश में बड़े ही धूमधाम के साथ मनाई जाती है। इस दिन चैत्र नवरात्रि का आखिरी दिन होता है। यानी नौ दिनों तक नवरात्रि पर शक्ति की उपासना की जाती है फिर नवरात्रि के नौवें दिन धूम-धाम के साथ मर्यादा पुरुषोत्तम प्रभु राम का जन्मोत्सव मनाया जाता है। वैदिक ज्योतिष शास्त्र के अनुसार भगवान राम के जन्म के समय सूर्य, बुध, गुरु, शुक्र और शनि ग्रह का विशेष योग बना था। जब भगवान राम का जन्म हुआ था तो उस समय सूर्य, मंगल, गुरु, शुक्र और शनि अपनी-अपनी उच्च राशि में मौजूद थे। हिंदू पंचांग की गणना के मुताबिक इस वर्ष राम नवमी का पर्व 17 अप्रैल 2024, बुधवार को मनाया जाएगा।
राम नवमी तिथि और शुभ मुहूर्त 2024
हिंदू पंचांग के अनुसार चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 16 अप्रैल को दोपहर 01 बजकर 23 मिनट से आरंभ होगी और 17 अप्रैल 2024 को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट पर खत्म हो जाएगी। उदया तिथि के आधार पर राम नवमी का पर्व 17 अप्रैल को मनाई जाएगी। ऐसे में राम नवमी पर मध्याह्र पूजा का शुभ मुहूर्त 11 बजकर 10 मिनट से लेकर 01 बजकर 43 तक रहेगा।
नवमी तिथि प्रारम्भ- 16 अप्रैल 2024 को दोपहर 01 बजकर 23 मिनट तक।
नवमी तिथि समाप्त- 17 अप्रैल 2024 को दोपहर 03 बजकर 14 मिनट तक।
राम नवमी अभिजीत मुहूर्त - इस दिन अभिजीत मुहूर्त नहीं रहेगा।
विजय मुहूर्त- दोपहर 02 बजकर 34 मिनट से 03 बजकर 24 मिनट तक।
गोधूलि मुहूर्त - शाम 06 बजकर 47 मिनट से 07 बजकर 09 मिनट तक।
रवि योग - पूरे दिन।
रवि योग में राम नवमी
इस वर्ष राम नवमी पर बहुत ही शुभ योग बन रहा है। रवि योग में राम नवमी का त्योहार मनाया जाएगा। ज्योतिष शास्त्र में रवि योग को बहुत शुभ माना गया है। इस योग में सूर्य का प्रभाव होने से सभी तरह के कष्टों से मुक्ति मिल जाती है। रवि योग में धर्म-कर्म और पूजा-पाठ करने से जीवन में सफलता और मान-सम्मान की प्राप्ति होती है।
राम नवमी पर क्या करें
मात्र राम नाम के जाप से व्यक्ति का सारे कष्ट दूर हो जाते हैं। ऐसे में राम नवमी के त्योहार पर रामायण का पाठ और राम रक्षा स्तोत्र का पाठ करने से जीवन में सुख और समृद्धि बनी रहती है। राम नवमी के दिन सुबह जल्दी उठकर स्नानादि करके सूर्यदेव को जल अर्पित करें और भगवान राम को पीले रंग के कपड़े, पीले फूल चढ़ा कर राम स्तुति करें।
राम नवमी पूजा विधि
हर वर्ष चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि पर बड़े ही धूमधाम के साथ राम नवमी का पर्व मनाया जाता है। इस बार अयोध्या में बने भव्य राम मंदिर में विशेष रूप से राम नवमी का त्योहार मनाया जाएगा। राम नवमी पर सबसे पहले भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण जी और हनुमानजी की मूर्तियों को चौकी स्थापित करें। फिर इसके बाद जल अर्पित करें। फिर चंदन, रोली, अक्षत, फूल आदि पूजन सामग्री चढ़ाएं। फूल अर्पित करने के बाद फल कई तरह के भोक का नैवेद्य लगाकर आरती करें। राम नवमी पर भगवान राम का जाप, राम रक्षा स्त्रोत, श्रीराम चालीसा और रामायण की चौपाइयों का पाठ करें। राम नवमी पर प्रभु राम की पूजा के साथ उनके भक्त हनुमान जी की भी विशेष पूजा-उपासना का महत्व है इस दिन सुंदरकांड और हनुमान चालीसा का पाठ जरूर करें।
'राम' नाम के जप का महत्व
धर्म शास्त्रों के अनुसार राम का नाम अमोघ है। इसमें ऐसी शक्ति है जो इस संसार के तो क्या,परलोकों के संकट काटने में भी सक्षम है। माना गया है कि अंतिम समय में राम का नाम लेने वाला व्यक्ति मोक्ष को प्राप्त होता है।भगवान श्री रामचंद्र जी का नाम इस कलयुग में कल्पवृक्ष अर्थात मनचाहा फल प्रदान करने और कल्याण करने वाला है। अनादि काल से महादेव जिस नाम का स्मरण करते है और जिस नाम की महिमा का बखान भगवती पार्वती से किया हैं,जिनके सेवार्थ उन्होंने श्री हनुमत रूप में अवतार लिया ऐसे प्रभु श्री राम का नाम लिखना,बोलना भवसागर से पार तो लगाता है ही साथ ही मनुष्य को समस्त प्रकार के दैहिक,दैविक एवं भौतिक तापों से मुक्ति प्रदान करता है।