षटतिला एकादशी माघ मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली एकादशी तिथि धार्मिक दृष्टि से अत्यंत पवित्र मानी जाती है। यह दिन भगवान विष्णु की आराधना और पुण्य प्राप्ति के लिए विशेष महत्व रखता है। शास्त्रों में इस एकादशी पर भगवान विष्णु के पसीने से उत्पन्न तिल के उपयोग को अनिवार्य बताया गया है। ‘षटतिला’का अर्थ ही है तिल के छह प्रकार के उपयोग। इन उपायों से पापों का नाश, पितरों की शांति और सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है।
1. तिल स्नान से शरीर और मन की शुद्धि
षटतिला एकादशी पर प्रातः काल स्नान के लिए जल में काले तिल डालना चाहिए। तिल जल से स्नान करने से शरीर और मन की शुद्धि होती है। यह उपाय न केवल पवित्रता प्रदान करता है बल्कि शरीर की नकारात्मक ऊर्जा को समाप्त करता है। इस स्नान से आध्यात्मिक ऊर्जा का संचार होता है और भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त होती है।
2. तिल दान से पितरों को संतोष
षटतिला एकादशी के दिन तिल दान करना सबसे बड़ा पुण्य माना गया है। इस दिन ब्राह्मणों, गरीबों और जरूरतमंदों को तिल, गुड़, अन्न और वस्त्र का दान करें। शास्त्रों के अनुसार, तिल दान से पितरों को तृप्ति मिलती है और उनका आशीर्वाद परिवार को सुख-समृद्धि प्रदान करता है।
3. तिल का भोजन आरोग्य और आध्यात्मिक लाभ
षटतिला एकादशी पर तिल से बनी वस्तुओं का सेवन करना शुभ माना गया है। तिल के लड्डू, तिल-गुड़ की मिठाई, या तिल की खीर बनाकर भगवान को भोग लगाएं और फिर प्रसाद के रूप में इसे ग्रहण करें। तिल का भोजन न केवल शरीर को ऊर्जावान बनाता है, बल्कि इसे ग्रहण करने से आध्यात्मिक लाभ भी प्राप्त होते हैं।
4. तिल दीपदान से जीवन में प्रकाश
इस पावन तिथि पर भगवान विष्णु और तुलसी माता के समक्ष तिल के तेल का दीपक जलाना अत्यंत फलदायी होता है। यह दीपक आर्थिक परेशानियों को समाप्त करता है और घर में समृद्धि लाता है। तिल के दीपदान से देवी-देवता प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।
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5. तिल हवन से दोष निवारण
षटतिला एकादशी पर तिल का हवन करना सभी प्रकार के दोषों का निवारण करता है। हवन में काले तिल, गुड़, गाय का घी और अन्य सामग्री मिलाकर आहुति दी जाती है। यह पितरों को संतोष प्रदान करता है और घर की नकारात्मकता को समाप्त करता है। यह उपाय परिवार में सुख-शांति और समृद्धि का मार्ग प्रशस्त करता है।
6. तिल तर्पण पितरों की तृप्ति
इस दिन जल में तिल मिलाकर पितरों को अर्पित करना तर्पण कहलाता है। यह तर्पण पितरों की आत्मा को शांति और तृप्ति प्रदान करता है। शास्त्रों के अनुसार, पितरों की कृपा से परिवार में सुख-शांति बनी रहती है और हर प्रकार की बाधा दूर होती है।