मां दुर्गा के नौ स्वरूप
शैलपुत्री
नवरात्रि के पहले दिन देवी दुर्गा के प्रथम स्वरूप मां शैलपुत्री की पूजा की जाती है। देवी शैलपुत्री की पूजा करने से हर मनोकमानएं पूरी होती हैं। देवी को सफेद वस्तुएं प्रिय हैं। ऐसे में शारदीय नवरात्रि में उन्हें सफेद मिष्ठान का भोग लगाना चाहिए। इससे सुख-समृद्धि का वास होता है।
ब्रह्मचारिणी
नवरात्रि के दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी की पूजा का विधान है। उनकी आराधना में हमेशा 'या देवी सर्वभूतेषु माँ ब्रह्मचारिणी रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।।' मंत्र का जाप करना चाहिए। इससे भाग्य में वृद्धि होती हैं। साथ ही लंबी आयु का आशीर्वाद प्राप्त होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार ब्रह्मचारिणी को शक्कर का भोग लगाने से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता।
चंद्रघंटा
मां दुर्गाजी की तीसरी शक्ति का नाम चंद्रघंटा हैं, और नवरात्रि के तीसरे दिन इन्हीं के विग्रह की पूजा-अर्चना की जाती है। इस दिन देवी की विधिनुसार पूजा अर्चना करने से व्यक्ति बुरी बलाओं से बचा रहता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार मां चंद्रघंटा के आशीर्वाद से समस्त पाप और बाधाएं नष्ट हो जाती हैं।
कुष्मांडा
चौथे दिन देवी दुर्गा के कूष्मांडा स्वरूप की पूजा की जाती है। इस दिन व्रत रखने से जातक के सभी कष्ट दूर और कामनाएं पूरी होती हैं।
स्कंदमाता
नवरात्रि के पांचवे दिन स्कंदमाता की पूजा की जाती है। देवी की आराधना से जातक को सुख और सौभाग्य का वरदान मिलता है। इस दौरान पूजा में 'सिंहासनगता नित्यं पद्माश्रितकरद्वया। शुभदास्तु सदा देवी स्कन्दमाता यशस्विनी॥' मंत्र का जाप करना चाहिए।
कात्यायनी
छठे दिन मां कात्यायनी की पूजा की जाती है। देवी की विधि अनुसार पूजा अर्चना करने से विवाह संबंधी समस्याएं दूर होती हैं। साथ ही जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है।
कालरात्रि
सातवें दिन मां दुर्गा की सातवीं शक्ति माता कालरात्रि की पूजा का विधान है। इस दिन माता कालरात्रि की पूजा और सच्चे मन से उपवास रखने से सभी बुरी शक्तियां दूर होती है।
महागौरी
नवरात्रि के आठवें दिन माता महागौरी की आराधना का विधान है। इस दिन देवी की पूजा करने से व्यक्ति को अक्षय पुण्यों की प्राप्ति होती हैं। मान्यताओं के अनुसार देवी महागौरी को मोगरे के फूल अति प्रिय हैं। पूजा में इस फूल को शामिल करने से असंभव कार्य भी संभव हो जाते हैं।
सिद्धिदात्री
नवें दिन मां दुर्गाजी की नवीं शक्ति सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। मां सिद्धिदात्री की अर्चना करने से जातक के सभी कार्य बिना किसी बाधा के पूरे होते हैं। साथ ही साधक को धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष की प्राप्ति होती हैं।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।