सावन शिवरात्रि 2025 की तिथि
वैदिक पंचांग के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को शिवरात्रि मनाई जाती है। सावन चतुर्दशी तिथि का प्रारंभ 24 जुलाई को सुबह 04 बजकर 38 मिनट पर होगा, जिसका समापन 24 जुलाई को देर रात 02 बजकर 29 मिनट पर होगा। ऐसे में 23 जुलाई को सावन माह की शिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा।
सावन शिवरात्रि का महत्व
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह शिवरात्रि का पर्व मनाया जाता है, लेकिन सावन माह मे पड़ने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है वहीं फाल्गुन माह की शिवरात्रि को महाशिवरात्रि के नाम से मनाया जाता है। सावन माह की शिवरात्रि के दिन व्रत, पूजन के साथ ही भगवान शिव का अभिषेक करना बहुत मंगलकारी माना गया है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को महादेव शिवलिंग के रूप में प्रकट हुए थे। तब से हर माह की कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी का दिन भगवान शिव की पूजा के लिए विशेष फलदाई माना गया है।शिवजी को प्रसन्न करने के लिए इस दिन जलाभिषेक,रुद्राभिषेक,दुग्धाभिषेक करने के साथ-साथ पंचामृत से भोलेनाथ का अभिषेक कर भक्त सुख-समृद्धि की कामना करते हैं।
सावन शिवरात्रि पर भद्रा का साया
पंचांग के अनुसार भद्रा का समय 23 जुलाई को सुबह 5 बजकर 36 मिनट से शुरू होकर दोपहर 3 बजकर 32 मिनट तक रहेगा। लेकिन इस दिन भद्रा स्वर्गलोक में रहेगी। इस कारण से इसका असर पृथ्वी पर नहीं रहेगा।
सावन शिवरात्रि पर चार प्रहर की पूजा का शुभ मुहूर्त
निशीत काल- रात 12 बजकर 26 मिनट से लेकर 01 बजकर 09 मिनट तक।
पहले प्रहर की पूजा- शाम 07 बजकर 27 मिनट से लेकर रात 10 बजकर 07 मिनट तक।
दूसरे प्रहर की पूजा- रात 10 बजकर 06 मिनट से लेकर रात 12 बजकर 46 मिनट तक।
तीसरे प्रहर की पूजा- रात 12 बजकर 46 मिनट से सुबह 3 बजकर 38 मिनट तक।
चौथे प्रहर की पूजा- 24 जुलाई सुबह 3 बजकर 27 मिनट से लेकर सुबह 06 बजकर 07 मिनट तक।
सावन शिवरात्रि व्रत का पारण समय
पंचांग के अनुसार सावन शिवरात्रि व्रत का पारण 24 जुलाई को सुबह 05 बजकर 27 मिनट से शुरू होगा।
इन मंत्रों के साथ करें जलाभिषेक
ॐ नम: शिवाय
ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्
ॐ तत्पुरुषाय विद्महे महादेवाय धीमहि तन्नो रुद्रः प्रचोदयात्॥
ॐ नमो भगवते रुद्राय नमः
श्रीभगवते साम्बशिवाय नमः
ॐ शर्वाय नम:।
ॐ विरूपाक्षाय नम:।
ॐ विश्वरूपिणे नम:।
ॐ कपर्दिने नम:।
ॐ भैरवाय नम:।
ॐ शूलपाणये नम:।
ॐ ईशानाय नम:।
ॐ महेश्वराय नम:।
ॐ नमो नीलकण्ठाय।
ॐ पार्वतीपतये नमः।
ॐ पशुपतये नम:।
ॐ ह्रीं ह्रौं नमः शिवाय।