Sawan 2025: आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है,जो 09 अगस्त तक चलेगा। सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। पूरे सावन माह में शिवजी की आराधना होती है। भगवान विष्णु के चार माह के लिए योग निद्रा में जाने से सृष्टि का संचालन सावन के एक महीने में महादेव करते हैं। हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। सावन के महीन में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं और कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। आइए जानते हैं सावन माह कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न, संपूर्ण पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं।
सावन माह में क्या करें और क्या नहीं
सावन में क्या न करें
सावन में क्यों होती है शिवजी की पूजा ?
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो चौदह रत्नों के साथ कालकूट विष भी निकला। यह विष इतना प्रचंड और घातक था कि उससे तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब समस्त देवताओं और ऋषियों के आग्रह पर भगवान शिव ने इस विष को अपनी कंठ में धारण किया जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित किया और बेलपत्र, धतूरा, आक आदि से उनका अभिषेक किया। मान्यता है कि यह समुद्र मंथन श्रावण मास में ही हुआ था। इसलिए इस मास में शिवजी का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, उपवास, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदायक माना गया है।
Sawan 2025: सावन में राशि अनुसार कैसे करें शिवलिंग की पूजा, इन उपायों से मिलेगी शिव कृपा
शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं बेलपत्र
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है। शिवपुराण में बेलपत्र को शिवजी के त्रिनेत्र का रूप माना गया है। बाएं नेत्र में चंद्रमा, दाएं नेत्र में सूर्य और बीच में अग्नि का वास होता है। ऐसे मं बेलपत्र अर्पित करने से शिवजी के साथ-साथ चंद्र, सूर्य और अग्नि की पूजा होती है। बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले भक्त पर भगवान आशुतोष अपनी कृपा बरसाते हैं ।साथ ही यह भी माना जाता है कि बेलपत्र को शिवजी को चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है।
बेलपत्र अर्पित करने के नियम