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Sawan 2025: आज से शिव आराधना का महापर्व सावन शुरू, जानिए शिव साधना से जुड़ी परंपराएं और पूजा विधि

Fri, 11 Jul 2025 06:37 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Sawan 2025:  हिंदू धर्म में सावन का महीना बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। 11 जुलाई 2025 से सावन का महीना शुरू हो रहा है। सावन के महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक होता है और कांवड़ यात्रा निकाली जाती है।
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sawan 2025: इस वर्ष सावन माह में चार सावन सोमवार व्रत रखे जाएंगे। - फोटो : adobe stock
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विस्तार
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Sawan 2025: आज से सावन का पवित्र महीना शुरू हो रहा है,जो 09 अगस्त तक चलेगा। सावन का महीना भगवान शिव का सबसे प्रिय महीना होता है। पूरे सावन माह में शिवजी की आराधना होती है। भगवान विष्णु के चार माह के लिए योग निद्रा में जाने से सृष्टि का संचालन सावन के एक महीने में महादेव करते हैं। हिंदू धर्म में सावन के महीने को बहुत ही शुभ और पवित्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार सावन के महीने में भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होते हैं और हर तरह की मनोकामनाओं को पूरा करते हैं। सावन के महीन में शिवलिंग पर जलाभिषेक, रुद्राभिषेक करते हैं और कांवड़ यात्रा निकाली जाती है। आइए जानते हैं सावन माह कैसे करें भोलेनाथ को प्रसन्न, संपूर्ण पूजा विधि और धार्मिक मान्यताएं। 

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सावन माह 2025 कब से कब तक ?
हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष श्रावण माह कृष्ण पक्ष की प्रतिपदा तिथि से आरंभ होता है और पूर्णिमा तिथि को खत्म हो जाता है।  इस वर्ष सावन माह 11 जुलाई से शुरू होकर 09 अगस्त 2025 तक रहेगा। पूरे 30 दिनों का सावन माह इस बार होगा। पंचांग के अनुसार आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि 11 जुलाई को सुबह 2 बजकर 6 मिनट तक रहेगाी, फिर इसके बाद शिवजी का सबसे प्रिय महीना श्रावण शुरू हो जाएगा। 

2025 में कितने सावन सोमवार और कब-कब
इस वर्ष सावन माह में चार सावन सोमवार व्रत रखे जाएंगे। श्रावण माह का पहला सोमवार व्रत 14 जुलाई को, दूसरा सावन सोमवार 21 जुलाई को, तीसरा सावन सोमवार 28 जुलाई को और चौथा सावन सोमवार 04 अगस्त को रहेगा। 
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सावन शिवरात्रि 2025 
हिंदू पंचांग के अनुसार हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि पर मासिक शिवरात्रि का व्रत रखा जाता है। सावन माह में आने वाली शिवरात्रि का विशेष महत्व होता है। इस वर्ष सावन शिवरात्रि 23 जुलाई 2025 को मनाई जाएगी। पंचांग के अनुसार श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि 23 जुलाई 2025 को सुबह 4 बजकर 39 मिनट से आरंभ होगी जो 24 जुलाई को सुबह 02 बजकर 28 मिनट तक रहेगी।  

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सावन मंगला गौरी व्रत 2025
सावन माह में आने वाले हर मंगलवार को मंगला गौरी व्रत रखा जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार माता पार्वती ने भगवान शिव को पति के रूप में पाने के लिए कठोर तप और व्रत रखा था। जिसमें सावन माह में आने वाली मंगला गौरी व्रत भी था। ऐसे में हर वर्ष सावन माह में सुहागिन महिलाएं और कुंवारी कन्याएं मंगला गौरी व्रत रखती हैं। इस वर्ष सावन माह में 15, 22, 29 जुलाई और 05 अगस्त को मंगला गौरी व्रत रखा जाएगा। 

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सावन माह का महत्व 
हिंदू धर्म में सावन माह का विशेष महत्व होता है। सावन का महीना भगवान भोलेनाथ को अतिप्रिय होता है और इस पूरे माह में भगवान शिव की विधि-विधान के साथ पूजा और व्रत रखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव जल्द प्रसन्न होते हैं। इन्हें प्रसन्न करने के लिए जल मात्र की काफी होता है। सावन में शिवलिंग पर जलाभिषेक करने से सुख-समृद्धि की प्राप्ति होती है। सावन माह में शिव आराधना करने से जीवन की सभी तरह ही अड़चनें दूर होती है और आर्थिक स्थिति बेहतर होती है।

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सावन सोमवार व्रत पूजा विधि
11 जुलाई से श्रावण का पवित्र महीना शुरू होकर 09 अगस्त तक चलेगा। इस बार सावन माह में चार सोमवार व्रत रखे जाएंगे। आइए जानते हैं सावन सोमवार व्रत की पूजा विधि।

  • सावन सोमवार व्रत के दिन ब्रह्ममुहूर्त में उठकर स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करना चाहिए।
  • शुद्ध होकर घर के मंदिर या शिवालय में बैठकर “ॐ नमः शिवाय” मंत्र के उच्चारण के साथ व्रत का संकल्प लें।
  • यह भी तय करें कि आप पूरे सावन के सोमवार व्रत करेंगे या किसी विशेष सोमवार को ही व्रत रखेंगे।
  • पूजन के दौरान शिवलिंग पर पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, शुद्ध जल) से अभिषेक करें।
  • इसके बाद बेलपत्र, धतूरा, शमीपत्र, सफेद फूल, और भस्म आदि अर्पित करें।
  • शिवजी की स्तुति हेतु "महामृत्युंजय मंत्र", "ॐ नमः शिवाय", या "शिव चालीसा" का पाठ करें।
  • रुद्राभिषेक और रुद्राष्टक पाठ इस दिन विशेष पुण्यदायी माने जाते हैं।

सावन माह में क्या करें और क्या नहीं

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सावन का महीना बहुत ही ही शुभ और पवित्र माना जाता है। इस माह में कई नियमों को पालन किया जाता है। 

सावन में क्या करें

  • सावन के महीने में हर दिन सुबह जल्दी उठना चाहिए और स्नान करके साफ-सुथरे कपड़े पहनें।
  • फिर घर के पास स्थित किसी शिव मंदिर जाकर शिव जी के दर्शन करते हुए जलाभिषेक करते हुए पूजा-अर्चना करें। 
  • दिन में कई बार भगवान शिव के मंत्रों का जाप और शिव जी का नाम का जाप करें।
  •  गरीबों और जरूरमंद लोगों को कपड़े, धन का दान और भोजन कराएं। 
  •  सावन सोमवार और शिवरात्रि का व्रत रखें और मंत्रों के जाप के साथ शिवलिंग पर जलाभिषेक करें। 
  • सावन में जलाभिषेक, रुद्राभिषेक, महामृत्युंजय और दूसरे धार्मिक अनुष्ठान करना शुभ होता है। 

सावन में क्या न करें

  • सावन माह में लहसुन और प्याज खाने से परहेज करें।
  • सावन के महीने में मांसाहारी भोजन और शराब का सेवन न करें। 
  • सावन में किसी के साथ वाद-विवाद न करें और गलत शब्द ना बोलें। 
  • सावन में गरीबों और बुजुर्गो का अपमान न करें।

सावन में क्यों होती है शिवजी की पूजा ? 
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र मंथन के समय जब देवता और असुरों ने मिलकर समुद्र मंथन किया तो चौदह रत्नों के साथ कालकूट विष भी निकला। यह विष इतना प्रचंड और घातक था कि उससे तीनों लोकों में हाहाकार मच गया। तब समस्त देवताओं और ऋषियों के आग्रह पर भगवान शिव ने इस विष को अपनी कंठ में धारण किया जिससे उनका कंठ नीला पड़ गया और वे 'नीलकंठ' कहलाए। विष के प्रभाव को शांत करने के लिए देवताओं ने उन्हें गंगाजल अर्पित किया और बेलपत्र, धतूरा, आक आदि से उनका अभिषेक किया। मान्यता है कि यह समुद्र मंथन श्रावण मास में ही हुआ था। इसलिए इस मास में शिवजी का जलाभिषेक, बेलपत्र अर्पण, उपवास, रुद्राभिषेक और महामृत्युंजय मंत्र का जाप अत्यंत फलदायक माना गया है।

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शिवलिंग पर क्यों चढ़ाते हैं बेलपत्र
शिवलिंग पर बेलपत्र अर्पित करने की धार्मिक मान्यता है। शिवपुराण में बेलपत्र को शिवजी के त्रिनेत्र का रूप माना गया है। बाएं नेत्र में चंद्रमा, दाएं नेत्र में सूर्य और बीच में अग्नि का वास होता है। ऐसे मं बेलपत्र अर्पित करने से शिवजी के साथ-साथ चंद्र, सूर्य और अग्नि की पूजा होती है। बेलपत्र और जल से पूजा करने वाले भक्त पर भगवान आशुतोष अपनी कृपा बरसाते हैं ।साथ ही यह भी माना जाता है कि बेलपत्र को शिवजी को चढ़ाने से दरिद्रता दूर होती है और व्यक्ति सौभाग्यशाली बनता है।

बेलपत्र अर्पित करने के नियम

  • भगवान शिव को हमेशा उल्टा बेलपत्र यानी चिकनी सतह की तरफ वाला वाला भाग स्पर्श कराते हुए ही बेलपत्र चढ़ाएं। 
  • बेलपत्र की तीन पत्तियों वाला गुच्छा भगवान शिव को चढ़ाया जाता है और माना जाता है कि इसके मूलभाग में सभी तीर्थों का वास होता है।
  • भगवान शिव को बेलपत्र चढ़ाने से सारे दुख दूर हो जाते हैं और भोलेनाथ  सारी मनोकामनाएं पूरी कर देते हैं।
  • बेलपत्र की तीन पत्तियां ही भगवान शिव को चढ़ती है। कटी-फटी पत्तियां कभी न चढ़ाएं।
  • कुछ तिथियों को बेलपत्र तोड़ना वर्जित होता है। चतुर्थी, अष्टमी, नवमी, चतुर्दशी और अमावस्या को, संक्रांति के समय और सोमवार को बेल पत्र नहीं तोड़ना चाहिए। 
  • बेलपत्र कभी अशुद्ध नहीं होता। पहले से चढ़ाया हुआ बेलपत्र भी फिर से धोकर चढ़ाया जा सकता है।
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