हिन्दू पंचांग में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। यह शुक्ल पक्ष की अंतिम तिथि होती है। हर माह में प्रत्येक पूर्णिमा तिथि आती है। इस प्रकार एक साल में 12 पूर्णिमा तिथि होती हैं। पूर्णिमा तिथि के दिन चंद्रमा अपने पूर्ण रूप में होता है। शास्त्रों के अनुसार पूर्णिमा तिथि को विशेष लाभकारी और पुण्यदायी तिथि माना गया है। इस दिन दान, स्नान और व्रत रखने की परंपरा होती है।
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार पूर्णिमा
ज्योतिष शास्त्र में पूर्णिमा का विशेष महत्व होता है। ज्योतिष में चंद्रमा को मन का कारक माना गया है। ज्योतिष की लगभग प्रत्येक गणना में चंद्रमा को केन्द्र में रखकर भविष्यवाणी की जाती है। पूर्णिमा के दिन महान साधु संतों का जन्म दिन और त्योहार मनाया जाता है।
पूर्णिमा का वैज्ञानिक महत्व
चांद का गहरा संबंध पृथ्वी पर मौजूद जल से होता है। जब भी पूर्णिमा की तिथि आती है उस दिन समुद्र में ज्वार-भाटा आता है। वैज्ञानिक नजरिए से पूर्णिमा के दिन चंद्रमा समुद्र के पानी को ऊपर की ओर खींचता है। पूर्णिमा के दिन जल की गति और गुण बदल जाने के कारण इसका प्रभाव मनुष्यों के शरीर पर भी पड़ता है क्योंकि मनुष्यों के शरीर में लगभग 80 फीसदी पानी होता है। वैज्ञानिक मत के अनुसार पूर्णिमा के प्रभाव से मनुष्यों के रक्त में न्यूरॉन कण अधिक क्रियाशील हो जाते है जिसके कारण इस दिन मनुष्यों के स्वभाव में परिव्रर्तन आ जाता है।
जानिए साल 2021 में कब-कब पड़ेगी पूर्णिमा तिथि
| पूर्णिमा |
तारीखें |
| पौष पूर्णिमा |
28 जनवरी, बृहस्पतिवार |
| माघ पूर्णिमा |
27 फरवरी, शनिवार |
| फाल्गुन पूर्णिमा |
28 मार्च, रविवार |
| चैत्र पूर्णिमा |
26 अप्रैल, सोमवार |
| बुद्ध पूर्णिमा |
26 मई, बुधवार |
| ज्येष्ठ पूर्णिमा |
जून 24, बृहस्पतिवार |
| आषाढ़ पूर्णिमा व्रत |
जुलाई 23, शुक्रवार |
| श्रावण पूर्णिमा |
22 अगस्त, रविवार |
| भाद्रपद पूर्णिमा |
20 सितंबर, सोमवार |
| आश्विन पूर्णिमा |
20 अक्तूबर, बुधवार |
| कार्तिक पूर्णिमा |
18 नवंबर, बृहस्पतिवार |
| मार्गशीर्ष पूर्णिमा |
18 दिसंबर, शनिवार |