फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Pitru Paksha 2024: घर पर इस विधि से करें पितरों का श्राद्ध, बनी रहेगी सुख-समृद्धि

Wed, 11 Sep 2024 01:22 PM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Pitru Paksha 2024: हिंदू धर्म में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष के सोलह दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों का ऋण उतरता है, और उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। 
विज्ञापन
पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Pitru Paksha 2024: हिंदू धर्म में पूर्वजों को प्रसन्न करने के लिए पितृ पक्ष के सोलह दिन बहुत महत्वपूर्ण माने जाते हैं। इस दौरान किए गए श्राद्ध कर्म से पितरों का ऋण उतरता है, और  उनकी आत्मा को मोक्ष की प्राप्ति होती हैं। पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से लेकर अश्विन माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि तक पितृ पक्ष चलते हैं। इस साल 17 सितंबर 2024 से पितृपक्ष की शुरुआत हो रही है, जो 2 अक्तूबर 2024 को समाप्त होंगे। 

विज्ञापन

इस दौरान पूर्वजों की आत्म शांति के लिए पिंडदान, तर्पण और ब्राह्मणों को भोज कराना चाहिए, इससे परिवार पर पितरों की कृपा बनी रहती है। साथ ही वह प्रसन्न होते हैं। माना जाता है कि पितृ पक्ष के दिनों में पितर धरती लोक आते हैं, और अपने परिजन से मिलते हैं। ऐसे में श्राद्ध कर्म करने से वंशों पर उनकी कृपा बनी रहती है। वहीं अगर आप किसी कारण वश बाहर श्राद्ध नहीं कर पा रहे हैं, तो घर पर भी संपूर्ण विधि के साथ आप श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इसी कड़ी में आइए जानते हैं कि घर पर कैसे  श्राद्ध कर सकते हैं।

 

Trending Videos
विज्ञापन

पितृ पक्ष में घर पर श्राद्ध करने की विधि
श्राद्ध तिथि के अनुसार आप पितरों का श्राद्ध करें। यदि आपको तिथि याद नहीं है, तो आप सर्वपितृ अमावस्या पर श्राद्ध कर्म कर सकते हैं। इस दिन सबसे पहले स्नान कर लें। फिर साफ वस्त्रों को पहनें। इस दौरान घर की साफ-सफाई का खास ध्यान रखना चाहिए। पितृपक्ष में सूर्यदेव के रूप में ही पितरों को पूजा जाता है। इसलिए आप सूर्यदेव को अर्ध्य दें। इसके बाद घर की दक्षिण दिशा में दीपक जलाएं। इससे पितृ प्रसन्न होते हैं। 

इसके बाद आप अपने पितरों की पसंद के अनुसार भोजन तैयार करें। फिर भोजन का पहला भोग पांच तरह के जीव यानी कौवा, गाय, कुत्ता, चींटियों और देवताओं को लगाएं। 

अब पितरों की तस्वीर के सामने धूप लगाएं, और उनकी पूजा शुरू करें। इस दौरान सफेद वस्तुओं का उपयोग करना चाहिए, जैसे, सफेद फूल, उड़द, गाय का दूध, घी, खीर, चावल, मूंग आदि। अब पितरों को भोजन का भोग लगाएं, और ग्रहण करने की प्रार्थना करें। इसके बाद आप ब्राह्मणों को भोजन कराएं, और अपनी श्रद्धा के अनुसार दान-दक्षिणा दें। 

श्राद्ध की सभी मुख्य तिथियां
17 सितंबर मंगलवार पूर्णिमा का श्राद्ध (ऋषियों के नाम से तर्पण)
18 सितंबर बुधवार प्रतिपदा तिथि का श्राद्ध (पितृपक्ष आरंभ)
19 सितंबर गुरुवार द्वितीया तिथि का श्राद्ध
20 सितंबर शुक्रवार तृतीया तिथि का श्राद्ध
21 सितंबर शनिवार चतुर्थी तिथि का श्राद्ध
22 सितंबर शनिवार पंचमी तिथि का श्राद्ध
23 सितंबर सोमवार षष्ठी और सप्तमी तिथि का श्राद्ध
24 सितंबर मंगलवार अष्टमी तिथि का श्राद्ध
25 सितंबर बुधवार नवमी तिथि का श्राद्ध
26 सितंबर गुरुवार दशमी तिथि का श्राद्ध
27 सितंबर शुक्रवार एकादशी तिथि का श्राद्ध
29 सितंबर रविवार द्वादशी तिथि का श्राद्ध
30 सितंबर सोमवार त्रयोदशी तिथि का श्राद्ध
1 अक्टूबर मंगलवार चतुर्दशी तिथि का श्राद्ध
2 अक्टूबर बुधवार सर्व पितृ अमावस्या (समापन)
 
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

 

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें