फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

MahaShivratri 2025: शिवभक्त रावण ने की थी इस स्तोत्र की रचना, महाशिवरात्रि पर जरूर करें इसका पाठ

Wed, 26 Feb 2025 05:15 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Shiva Tandava Stotra: महाशिवरात्रि का पर्व, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, 26 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने से महादेव के भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं। यदि भक्त इस दिन सच्चे मन से भोलेनाथ की पूजा करते हैं, तो वे उनकी सभी इच्छाओं को पूरा करते हैं। इसके अलावा, इस दिन शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत लाभकारी माना जाता है। यह स्तोत्र रावण द्वारा रचित है और पञ्चचामर छन्द पर आधारित है। शिव तांडव स्तोत्र को सुनने से मन शिव जी की भक्ति में लीन हो जाता है। इसलिए, हर किसी को इस पाठ का अनुसरण करना चाहिए, जो इस प्रकार है-
विज्ञापन
shiv tandav stotram - फोटो : amar ujala
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Shiva Tandava Stotram by Ravana: महाशिवरात्रि का पर्व, जो शिव और शक्ति के मिलन का प्रतीक है, 26 फरवरी को मनाया जाएगा। इस दिन व्रत रखने से महादेव के भक्तों के सभी दुख दूर हो जाते हैं। हिंदू धर्म के अनुसार, भगवान शिव जल्दी प्रसन्न होने वाले देवताओं में से एक हैं। भगवान शिव अपने भक्तों पर शीघ्र ही कृपा बरसाते हैं। शिव की पूजा के लिए केवल सच्चे भाव की आवश्यकता होती है। शिव जी में भारी से भारी अंधकार को दूर करने की शक्ति है। 

विज्ञापन


भोलेनाथ को शिव तांडव स्तोत्र अत्यंत प्रिय है, जिसे लंकापति रावण ने रचा था। इस स्तोत्र का पाठ करने से जीवन की कठिनाइयों का समाधान किया जा सकता है। यदि इस स्तोत्र का पाठ संध्या के समय किया जाए, तो इसका महत्व और भी बढ़ जाता है। जो साधक प्रतिदिन इसका पाठ करते हैं, उनके जीवन में भौतिक सुखों की कभी कमी नहीं होती। शिव तांडव स्तोत्र इस प्रकार है-

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को क्या चढ़ाना चाहिए और क्या नहीं? जानें यहां
विज्ञापन


Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर भोलेनाथ को चढ़ाना चाहते हैं बेलपत्र, जानें सही नियम

Maha Shivratri 2025: शिवलिंग पर जल चढ़ाने का सही नियम, जानें जलाभिषेक का शुभ मुहूर्त

Mahashivratri 2025: महाशिवरात्रि पर जपें भगवान शिव के ये 108 नाम, हर इच्छा होगी पूरी

शिव तांडव स्तोत्र - फोटो : अमर उजाला
कैसे हुई शिव तांडव स्तोत्र की रचना?
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण भगवान शिव का एक महान भक्त था। जब रावण पीड़ा में था, तब उसने तांडव स्तोत्र की रचना की। दरअसल, अहंकारी रावण ने कैलाश पर्वत को उठाने का प्रयास किया था, जिसके परिणामस्वरूप भगवान शिव ने अपने एक अंगूठे से पर्वत को दबाकर उसे स्थिर कर दिया। इस कारण रावण का हाथ पर्वत के नीचे दब गया। उस कठिनाई में, रावण ने भगवान शिव की स्तुति की, जिसे शिव तांडव स्तोत्र के नाम से जाना जाता है।

शिव तांडव स्तोत्र - फोटो : freepik
शिव तांडव स्तोत्र पाठ का लाभ
कहा जाता है कि तांडव स्तोत्र का पाठ करने वाले व्यक्ति पर भगवान शिव की विशेष कृपा बनी रहती है। यह पाठ अत्यंत लाभकारी है और इसे नियमित रूप से करना चाहिए। इसके पाठ से व्यक्ति दुख, दरिद्रता और पाप कर्मों से मुक्ति प्राप्त करता है। तांडव स्तोत्र का पाठ मुख्य रूप से सोमवार और शनिवार को किया जाना चाहिए, क्योंकि ये दिन भगवान शिव को समर्पित होते हैं। शिव तांडव स्तोत्र का पाठ करने से व्यक्ति कालसर्प और शनि के दुष्प्रभावों से भी सुरक्षित रहता है।
विज्ञापन

शिव तांडव स्तोत्र - फोटो : freepik
शिव तांडव स्तोत्र
जटाटवीगलज्जलप्रवाहपावितस्थले
गलेऽवलम्ब्य लम्बितां भुजङ्गतुङ्गमालिकाम् ।
डमड्डमड्डमड्डमन्निनादवड्डमर्वयं
चकार चण्डताण्डवं तनोतु नः शिवः शिवम् ॥॥

जटाकटाहसम्भ्रमभ्रमन्निलिम्पनिर्झरी
विलोलवीचिवल्लरीविराजमानमूर्धनि ।
धगद्धगद्धगज्ज्वलल्ललाटपट्टपावके
किशोरचन्द्रशेखरे रतिः प्रतिक्षणं मम ॥॥

धराधरेन्द्रनंदिनीविलासबन्धुबन्धुर
स्फुरद्दिगन्तसन्ततिप्रमोदमानमानसे ।
कृपाकटाक्षधोरणीनिरुद्धदुर्धरापदि
क्वचिद्दिगम्बरे(क्वचिच्चिदम्बरे) मनो विनोदमेतु वस्तुनि ॥॥

जटाभुजङ्गपिङ्गलस्फुरत्फणामणिप्रभा
कदम्बकुङ्कुमद्रवप्रलिप्तदिग्वधूमुखे ।
मदान्धसिन्धुरस्फुरत्त्वगुत्तरीयमेदुरे
मनो विनोदमद्भुतं बिभर्तु भूतभर्तरि ॥॥

सहस्रलोचनप्रभृत्यशेषलेखशेखर
प्रसूनधूलिधोरणी विधूसराङ्घ्रिपीठभूः ।
भुजङ्गराजमालया निबद्धजाटजूटक
श्रियै चिराय जायतां चकोरबन्धुशेखरः ॥॥

ललाटचत्वरज्वलद्धनञ्जयस्फुलिङ्गभा
निपीतपञ्चसायकं नमन्निलिम्पनायकम् ।
सुधामयूखलेखया विराजमानशेखरं
महाकपालिसम्पदेशिरोजटालमस्तु नः ॥॥

करालभालपट्टिकाधगद्धगद्धगज्ज्वल
द्धनञ्जयाहुतीकृतप्रचण्डपञ्चसायके ।
धराधरेन्द्रनन्दिनीकुचाग्रचित्रपत्रक
प्रकल्पनैकशिल्पिनि त्रिलोचने रतिर्मम ॥॥

नवीनमेघमण्डली निरुद्धदुर्धरस्फुरत्
कुहूनिशीथिनीतमः प्रबन्धबद्धकन्धरः ।
निलिम्पनिर्झरीधरस्तनोतु कृत्तिसिन्धुरः
कलानिधानबन्धुरः श्रियं जगद्धुरंधरः ॥॥

प्रफुल्लनीलपङ्कजप्रपञ्चकालिमप्रभा
वलम्बिकण्ठकन्दलीरुचिप्रबद्धकन्धरम् ।
स्मरच्छिदं पुरच्छिदं भवच्छिदं मखच्छिदं
गजच्छिदांधकच्छिदं तमन्तकच्छिदं भजे ॥॥

अगर्व सर्वमङ्गलाकलाकदम्बमञ्जरी
रसप्रवाहमाधुरी विजृम्भणामधुव्रतम् ।
स्मरान्तकं पुरान्तकं भवान्तकं मखान्तकं
गजान्तकान्धकान्तकं तमन्तकान्तकं भजे ॥॥

जयत्वदभ्रविभ्रमभ्रमद्भुजङ्गमश्वस
द्विनिर्गमत्क्रमस्फुरत्करालभालहव्यवाट् ।
धिमिद्धिमिद्धिमिध्वनन्मृदङ्गतुङ्गमङ्गल
ध्वनिक्रमप्रवर्तित प्रचण्डताण्डवः शिवः ॥॥

दृषद्विचित्रतल्पयोर्भुजङ्गमौक्तिकस्रजोर्
गरिष्ठरत्नलोष्ठयोः सुहृद्विपक्षपक्षयोः ।
तृणारविन्दचक्षुषोः प्रजामहीमहेन्द्रयोः
समं प्रव्रितिक: कदा सदाशिवं भजाम्यहम ॥॥

कदा निलिम्पनिर्झरीनिकुञ्जकोटरे वसन्
विमुक्तदुर्मतिः सदा शिरः स्थमञ्जलिं वहन् ।
विमुक्तलोललोचनो ललामभाललग्नकः
शिवेति मंत्रमुच्चरन् कदा सुखी भवाम्यहम् ॥॥

निलिम्प नाथनागरी कदम्ब मौलमल्लिका-
निगुम्फनिर्भक्षरन्म धूष्णिकामनोहरः ।
तनोतु नो मनोमुदं विनोदिनींमहनिशं
परिश्रय परं पदं तदङ्गजत्विषां चयः ॥॥

प्रचण्ड वाडवानल प्रभाशुभप्रचारणी
महाष्टसिद्धिकामिनी जनावहूत जल्पना ।
विमुक्त वाम लोचनो विवाहकालिकध्वनिः
शिवेति मन्त्रभूषगो जगज्जयाय जायताम् ॥॥

इमं हि नित्यमेवमुक्तमुत्तमोत्तमं स्तवं
पठन्स्मरन्ब्रुवन्नरो विशुद्धिमेतिसंततम् ।
हरे गुरौ सुभक्तिमाशु याति नान्यथा गतिं
विमोहनं हि देहिनां सुशङ्करस्य चिंतनम् ॥॥

पूजावसानसमये दशवक्त्रगीतं
यः शम्भुपूजनपरं पठति प्रदोषे ।
तस्य स्थिरां रथगजेन्द्रतुरङ्गयुक्तां
लक्ष्मीं सदैव सुमुखिं प्रददाति शम्भुः ॥॥

इति श्रीरावण कृतम्
शिव ताण्डव स्तोत्र संपूर्णम 

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें