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Kartik Purnima 2024: कार्तिक पूर्णिमा पर 30 साल बाद बनेगा शश राजयोग, दान-पूजा का मिलेगा फल

Sun, 10 Nov 2024 11:19 AM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Kartik Purnima 2024:  कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रमा और मंगल एक दूसरे की राशि में रहेंगे। कार्तिक पूर्णिमा पर देर रात गजकेसरी राजयोग बन रहा है। 
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शनि 30 साल बाद कुंभ राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप जो भी कार्य या दान करेंगे उसका सौ गुना फल मिलेगा। - फोटो : Amar Ujala
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विस्तार
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Kartik Purnima 2024: कार्तिक पूर्णिमा का त्योहार धार्मिक दृष्टि से बहुत खास है। इस दिन देव दिवाली का त्योहार भी मनाते हैं। इस दिन दान आदि का भी विशेष महत्व है। आइए जानते हैं इस दिन क्या किया जाएगा और कार्तिक पूर्णिमा का शुभ मुहूर्त क्या होगा।

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देव दीपावली पर शुभ योग 
इस कार्तिक पूर्णिमा पर चंद्रमा और मंगल एक दूसरे की राशि में रहेंगे। कार्तिक पूर्णिमा पर देर रात गजकेसरी राजयोग बन रहा है। इस दिन बुधादित्य राजयोग भी बन रहा है। उसके बाद 30 वर्ष बाद कार्तिक पूर्णिमा पर शश राजयोग का निर्माण होगा। शनि 30 साल बाद कुंभ राशि में गोचर करेंगे। ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप जो भी कार्य या दान करेंगे उसका सौ गुना फल मिलेगा।

कार्तिक पूर्णिमा तिथि 
पंचांग के अनुसार कार्तिक माह की पूर्णिमा तिथि की शुरुआत 15 नवंबर, प्रातः  06:19 मिनट पर होगी।  वहीं, इस तिथि का समापन अगले दिन यानी 16 नवंबर को देर रात्रि को 02:58 मिनट पर होगा।  ऐसे में कार्तिक पूर्णिमा का पर्व 15 नवंबर को मनाया जाएगा। 
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शुभ मुहूर्त 
स्नान-दान शुभ मुहूर्त -प्रातः 04:58 मिनट से प्रातः 5:51 मिनट तक
सत्यनारायण पूजा - प्रातः 06:44 मिनट से प्रातः 10:45 मिनट तक.

देव दिवाली पर दीपदान का महत्व 
देव दिवाली के दिन सभी देवता गंगा घाट पर आकर दीप जलाकर अपनी खुशी को दर्शाते हैं। इसलिए कार्तिक पूर्णिमा के दिन दीप दान करने का बहुत महत्व है। इस दिन नदी और तालाब में दीप दान करने से सभी परेशानियां दूर हो जाती हैं और व्यक्ति कर्ज से भी मुक्त हो जाता है। कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने घर के मुख्य द्वार पर आम के पत्तों से बनाया हुआ तोरण जरूर बांधे और उसके चारों ओर दिवाली की तरह ही दीपक जलाएं।

कार्तिक पूर्णिमा पूजा विधि 

  • कार्तिक पूर्णिमा के दिन आप सुबह जल्दी उठकर अपने घर की साफ-सफाई करें। 
  • फिर स्नान करें  और सूर्य देव को अर्घ्य दें। 
  • यदि संभव हो तो इस पवित्र नदी में स्नान करें। 
  • इसके बाद चौकी पर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की मूर्तियां और तस्वीरें स्थापित करें। 
  • भगवान विष्णु को सुगंध, फूल, फल, पुष्प और वस्त्र अर्पित किए जाते हैं। 
  • देवी लक्ष्मी को 16 श्रृंगार सामग्री अर्पित करें। 
  • देसी गाय के घी का दीपक जलाएं, आरती करें और मंत्रों का जाप करें।  
  • भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें। 
  • व्रत कथा का पाठ करें  और ज़रूरतमंदों को दान दें।


डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 

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