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तीज पर्व 2026: हरतालिका तीज पर भूलकर ना करें ये काम, पूजा रह जाती है अधूरी

Wed, 09 Sep 2026 07:30 PM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए व्रत रखती हैं और कई तरह के नियमों का पालन करती हैं। 
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हरतालिका तीज व्रत 2026 - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सुहागिन महिलाओं के लिए हरतालिका तीज का व्रत बहुत ही खास माना जाता है। इस दिन सुहागिन महिलाएं अखंड सौभाग्य और सुखी वैवाहिक जीवन के लिए व्रत करती हैं और मनोकामना मांगती है। हरतालिका तीज हिंदू पंचांग के अनुसार, हर वर्ष भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है। इस वर्ष हरतालिका तीज की तृतीया तिथि 13 सितंबर को सुबह 7 बजकर 8 मिनट से शुरू होकर 14 सितंबर की सुबह 7 बजकर 6 मिनट तक रहेगी। ऐसे में उदया तिथि के आधार पर व्रत 14 सितंबर को रखा जाएगा। हरतालिका तीज व्रत को लेकर कई तरह के नियम होते हैं। जिनका पालन करना होता है आइए जानते हैं व्रत रखते हुए किन-किन नियमों का पालन करना होता है। 

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- हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाएं श्रृंगार विशेष रूप से करती हैं। ऐसे में इस दिन भूलकर भी काले कपड़े या काली चुड़ियां नहीं पहननी चाहिए। इस दिन श्रृंगार के लिए लाल रंग को प्राथमिकता देना चाहिए। हरितालिका तीज लाल रंग सुहाग और शुभता की निशानी है।

- हरतालिका तीज पर सुहागिन महिलाओं के पूरे दिन व्रत रखते हुए शांत रहना चाहिए। इस दिन परिवार के सदस्य या फिर किसी बाहरी व्यक्ति के साथ वाद-विवाद या क्रोध करने से बचना चाहिए। मन में किसी भी तरह का नकारात्मक भावना नहीं आनी चाहिए।
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- हरतालिका तीज पर भगवान शिव और माता पार्वती की कृपा पाने के लिए इस दिन सोने से बचना चाहिए। खाली समय में भगवान शिव और माता पार्वती का स्मरण, भजन, मंत्र और जाप करने की परंपरा होती है। 

- हरतालिका तीज का व्रत जो एक बार शुरू करने के बाद, उसे हर साल निभाया जाता है। इस व्रत में संकल्प लेने का विशेष महत्व होता है। कभी भी किसी साल में इस व्रत को नहीं तोड़ा जाता है। 

- हरतालिका तीज पर सबसे पहले पूजा भगवान गणेश की आराधना करें। बिना गणेश जी की पूजा, मंत्र और आरती के हरतालिका तीज पूरी नहीं मानी जाती है। शास्त्रों में भगवान गणेश को प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। इसके बाद भगवान शिव और पार्वती की विधि-विधान के साथ पूजा करनी चाहिए। इससे जीवन में खुशहाली और अखंड सौभाग्य की प्राप्ति होती है। 
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