फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Hariyali Amavasya 2025: शुभ योग में हरियाली अमावस्या आज, ऐसे करें पितरों और भोलेनाथ की पूजा

Thu, 24 Jul 2025 07:01 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

Hariyali Amavasya Shubh Muhurat: आज यानी 24 जुलाई को हरियाली अमावस्या पर गुरु-पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। हरियाली अमावस्या पर ब्रह्रा शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से लेकर 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा।
विज्ञापन
हरियाली अमावस्या - फोटो : adobe stock
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Hariyali Amavasya 2025: श्रावण माह के कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि को हर वर्ष हरियाली अमावस्या के नाम से मनाया जाता है। इस तिथि पर विशेष रूप भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा होती है। हिंदू पंचांग के अनुसार, हर माह अमावस्या का पर्व मनाया जाता है। श्रावण माह में आने वाली अमावस्या तिथि का विशेष महत्व होता है। अमावस्या तिथि पितरों को समर्पित होती है। इस दिन गंगा स्नान, दान, पुण्य और जाप से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है। हरियाली अमावस्या पर शनिदेव की भी पूजा करने का विधान होता है। इस दिन कुंडली में शनि से संबंधित दोषों को दूर करने के लिए और जीवन में आने वाली परेशानियों को कम करने के लिए कुछ उपाय बहुत ही कारगर साबित होते हैं। इस बार हरियाली अमावस्या पर काफी दुर्लभ योगों का निर्माण होने वाला है। 
विज्ञापन


हरियाली अमावस्या 2025 तिथि
हिंदू पंचांग के अनुसार श्रावण माह की अमावस्या तिथि 24 जुलाई 2025 को सुबह 02 बजकर 28 मिनट से शुरू होगी और इस तिथि का समापन 25 जुलाई 2025 को दोपहर 12 बजकर 40 मिनट पर होगा। उदय तिथि के अनुसार हरियाली अमावस्या का त्योहार 24 जुलाई को है। 

श्रावण माह की हरियाली अमावस्या कल: प्रकृति, पितृ और परमेश्वर को अर्पित श्रद्धा का पर्व

हरियाली अमावस्या शुभ मुहूर्त और योग
24 जुलाई को हरियाली अमावस्या पर गुरु-पुष्य नक्षत्र और सर्वार्थ सिद्धि योग बनेगा। हरियाली अमावस्या पर ब्रह्रा शुभ मुहूर्त सुबह 4 बजकर 15 मिनट से लेकर 4 बजकर 57 मिनट तक रहेगा। अभिजीत मुहूर्त दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से लेकर 3 बजकर 58 मिनट तक चलेगा। अमृत काल दोपहर 2 बजकर 26 मिनट से लेकर 3 बजकर 58 मिनट तक रहेगा।

Hariyali Amavasya 2025: हरियाली अमावस्या पर क्यों करते हैं नान्दीमुख श्राद्ध, क्या होगा फायदा?

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व
विज्ञापन

हरियाली अमावस्या का धार्मिक महत्व अनेक पुराणों और शास्त्रों में वर्णित है। यह दिन भगवान शिव और माता पार्वती की आराधना का श्रेष्ठ समय माना जाता है। इस दिन शिवलिंग पर बेलपत्र, धतूरा और अन्य पूजन सामग्रियां अर्पित करने से विशेष फल की प्राप्ति होती है। मान्यता है कि इस दिन व्रत और पूजा करने से सभी प्रकार के पापों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख-समृद्धि का वास होता है। नारद पुराण के अनुसार श्रावण मास की अमावस्या को पितृ श्राद्ध, दान, होम और देव पूजा एवं वृक्षारोपण आदि शुभ कार्य करने से अक्षय फल की प्राप्ति होती है।

Putrada Ekadashi 2025: कब है पुत्रदा एकादशी? जानें तिथि, शुभ मुहूर्त, पूजा विधि, पारण का समय और महत्व

हरियाली अमावस्या पूजा विधि
प्रातःकाल स्नान कर शुद्ध वस्त्र धारण करें और पूजा स्थल को स्वच्छ कर वहां पर शिवलिंग या भगवान शिव की प्रतिमा स्थापित करें। हाथ में जल लेकर व्रत और पूजा का संकल्प करें। भगवान शिव के सामने आसन पर बैठकर ध्यान और प्रार्थना करें। शिव मंत्रों का उच्चारण करते हुए जल और गंगाजल से शिवलिंग का अभिषेक करें। पंचामृत (दूध, दही, घी, शहद, और शक्कर का मिश्रण) से शिवलिंग का स्नान कराएं और पुनः शुद्ध जल से अभिषेक करें। इसके बाद शिवलिंग पर चंदन, अक्षत, और पुष्प अर्पित करें। भगवान शिव को बेलपत्र और धतूरा अर्पित करें। धूप और दीप जलाकर भगवान शिव की आरती करें। आरती के पश्चात भगवान शिव को फल और मिठाई का भोग अर्पित करें। 'ॐ नमः शिवाय' मंत्र का जाप करें। शिव पुराण के अनुसार, इस मंत्र का जाप करने से सभी कष्टों से मुक्ति मिलती है और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।
विज्ञापन



 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें