भगवान गणेश की पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के शुभ दिन पर आप सुबह ही स्नान कर लें, और साफ वस्त्रों को धारण करें। अब गणेश जी की प्रतिमा लें, और उसे चौकी पर स्थापित कर दें। वास्तु के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा को घर के केंद्र में और पूर्व दिशा में रखें। इस दिशा में मूर्ति रखने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके बाद गणेश मंत्रों का जप करते हुए चारों तरफ गंगाजल का छिड़काव करें। अब आप बप्पा को सिंदूर अर्पित करें। फिर उन्हें फूल और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद बप्पा को 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। अब गणेश चतुर्थी की कथा सुनें। अतं में गणेश चालीसा व आरती पढ़कर पूजा समाप्त करें।
गणेश जी की आरती
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।