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Ganesh Chaturthi 2024: गणेश चतुर्थी पर बन रहे हैं कई शुभ योग, इस विधि से करें बप्पा की पूजा

Sat, 07 Sep 2024 06:24 AM IST
मेघा कुमारी धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Ganesh Chaturthi 2024: 7 सितंबर 2024 को गणेश चतुर्थी है, जबकि गणेश विसर्जन 17 सितंबर 2024 को किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म योग बन रहा है, जो रात 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगा।
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भगवान गणेश की पूजा विधि - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Ganesh Chaturthi 2024: 7 सितंबर 2024 को गणेश चतुर्थी है, जबकि गणेश विसर्जन 17 सितंबर 2024 को किया जाएगा। इस दिन ब्रह्म योग बन रहा है, जो रात 11 बजकर 16 मिनट तक रहेगा। इस दौरान विष्टि, बव करण के साथ चित्रा नक्षत्र का संयोग भी बनेगा। इस तिथि पर विघ्नहर्ता की आराधना करने से बुद्धि और विद्या का आशीर्वाद प्राप्त होता है। हिंदू धर्म में उन्हें प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। किसी भी नए कार्य की शुरुआत भगवान गणेश के नाम से करने पर उसमें सफलता अवश्य मिलती हैं। उन्हें विघ्नहर्ता के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि गणेश जी सभी भक्तजनों के दुखों और कष्टों को हर लेते हैं।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार गणेश पूजन के लिए गणेश चतुर्थी का दिन उत्तम माना जाता है। इस दिन भक्तजन बप्पा को घर लाते हैं, और करीब 10 दिनों तक उनकी आराधना करते हैं। भारत में इस पर्व को बड़े धूमधाम से मनाया जाता है। इस साल गणेश चतुर्थी पर कई शुभ योग का संयोग बन रहा है। ऐसे में विघ्नहर्ता की पूजा करने से जीवन में खुशियों का वास बना रहता है। इसी कड़ी में आइए गणेश पूजन विधि के बारे में जान लेते हैं।  

भगवान गणेश की पूजा विधि
गणेश चतुर्थी के शुभ दिन पर आप सुबह ही स्नान कर लें, और साफ वस्त्रों को धारण करें। अब गणेश जी की प्रतिमा लें, और उसे चौकी पर स्थापित कर दें। वास्तु के अनुसार गणेश जी की प्रतिमा को घर के केंद्र में और पूर्व दिशा में रखें। इस दिशा में मूर्ति रखने से सकारात्मक परिणाम मिलते हैं, और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है। इसके बाद गणेश मंत्रों का जप करते हुए चारों तरफ गंगाजल का छिड़काव करें। अब आप बप्पा को सिंदूर अर्पित करें। फिर उन्हें फूल और मिठाई चढ़ाएं। इसके बाद बप्पा को 21 लड्डुओं का भोग लगाएं। अब गणेश चतुर्थी की कथा सुनें। अतं में गणेश चालीसा व आरती पढ़कर पूजा समाप्त करें। 
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गणेश जी की आरती 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
पान चढ़े फल चढ़े, और चढ़े मेवा।
लड्डुअन का भोग लगे संत करें सेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
सूर' श्याम शरण आए, सफल कीजे सेवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥
दीनन की लाज रखो, शंभु सुतकारी।
कामना को पूर्ण करो जाऊं बलिहारी॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती पिता महादेवा॥

डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है। 
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