पांच दिवसीय दुर्गा पूजा 2025 कैलेंडर
षष्ठी तिथि (28 सितंबर 2025) – इस दिन पूजा की शुरुआत होती है। इसे कल्पारम्भ कहा जाता है, जिसमें पूजा की तैयारी और शुभ आरंभ किया जाता है।
सप्तमी तिथि (29 सितंबर 2025) – इस दिन मुख्य रूप से कोलाबौ पूजा होती है।
महाअष्टमी (30 सितंबर 2025) – इस दिन भोग और आरती के साथ-साथ सबसे महत्वपूर्ण संधि पूजा होती है।
महानवमी (1 अक्तूबर 2025) – नवमी के दिन महानवमी पूजा, दुर्गा बलिदान और नवमी होम का आयोजन होता है।
दशमी तिथि (2 अक्तूबर 2025) – आखिरी दिन सिंदूर खेला, दुर्गा विसर्जन और रावण दहन की रस्में निभाई जाती हैं।
दुर्गा पूजा विधि
- षष्ठी तिथि के दिन पूजा की शुरुआत बिल्व निमंत्रण और अन्य सामग्री के साथ होती है।
- घर या पंडाल में कलश स्थापना की जाती है, जिसमें जल, अक्षत, फल और पंचामृत रखा जाता है।
- यह देवी के आगमन का प्रतीक है और पूरे उत्सव का आधार बनता है।
- सप्तमी तिथि पर कोलाबौ पूजा या स्वागत पूजा होती है।
- देवी के स्वागत में भजन, आरती और मंत्रों का जाप किया जाता है।
- अष्टमी तिथि पर संधि पूजा, भोग और आरती होती है।
- देवी दुर्गा के नौ रूपों और शक्ति का महत्व अष्टमी पर विशेष रूप से माना जाता है।
- नवमी तिथि पर महा नवमी पूजा और दुर्गा बलिदान किया जाता है।
- नवमी पर हवन द्वारा घर और परिवार में सुरक्षा, समृद्धि और शुभता का आह्वान किया जाता है।
- दशमी तिथि पर महिलाएं सिंदूर खेला करती हैं और देवी के चरणों में सिंदूर अर्पित करती हैं।
- उसके बाद दुर्गा विसर्जन और रावण दहन करके उत्सव का समापन किया जाता है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं और धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।