फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Devshayani Ekadashi 2025: कब है देवशयनी एकादशी, जानिए इसका महत्व और पूजा विधि

Mon, 30 Jun 2025 07:49 AM IST
विनोद शुक्ला ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला

सार

शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ माह की एकादशी पर भगवान विष्णु के शयन करते हैं, जिसके अनुसार चार महीनों तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं।
विज्ञापन
इस बार देवशयनी एकादशी का व्रत 06 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। - फोटो : freepik
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Devshayani Ekadashi 2025: हिंदू धर्म में एकादशी तिथि का विशेष महत्व होता है। हर वर्ष आषाढ़ माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को देवशयनी के नाम से जाना जाता है। इस एकादशी पर भगवान विष्णु चार माह के लिए क्षीरसागर में योगनिद्रा के लिए चलते जाते हैं। ऐसे में चार महीनों के दौरान किसी भी तरह का कोई भी शुभ काम करना वर्जित होता है। इस चार माह के समय को चातुर्मास कहते हैं। इस एकादशी को हरिशयन, पद्मा या तुरी एकादशी भी कहते हैं। इस बार देवशयनी एकादशी का व्रत 06 जुलाई, रविवार को मनाई जाएगी। हिंदू पंचांग के अनुसार इस एकादशी तिथि की शुरुआत 5 जुलाई को शाम 6 बजकर 58 मिनट पर होगी जिसका समापन 6 जुलाई को रात 09 बजकर 14 मिनट पर होगी। उदया तिथि के आधार पर देवशयनी एकादशी 6 जुलाई को मनाई जाएगी। 

विज्ञापन


देवशयनी एकादशी का महत्व 
शास्त्रों के अनुसार आषाढ़ माह की एकादशी पर भगवान विष्णु के शयन करते हैं, जिसके अनुसार चार महीनों तक भगवान विष्णु क्षीरसागर में शयन करते हैं और कार्तिक मास की शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। यह चार महीने 'चातुर्मास' कहलाते हैं, इस दौरान शुभ काम जैसे विवाह, गृहप्रवेश आदि वर्जित माने जाते हैं।

सृष्टि के संचालक और पालनहार भगवान श्री हरि विष्णु हैं। ऐसे में देवशयनी एकादशी के बाद भगवान पूरे चार महीने के लिए योग निद्रा में चले जाते हैं। इस अवधि को भगवान का भी शयनकाल कहा जाता है। मान्यता है कि भगवान विष्णु के शयनकाल में जाने के बाद सृष्टि के संचालन का कार्यभार भगवान शिव संभालते हैं,इसलिए चातुर्मास के चार महीनों में विशेषरूप से शिवजी की उपासना फलदाई है।
विज्ञापन


July Vrat Tyohar List 2025: कब है हरियाली तीज, नाग पंचमी और देवशयनी एकादशी? यहां देखें पूरी सूची

देवशयनी एकादशी का व्रत रखने से व्यक्ति को धन, स्वास्थ्य और समृद्धि की प्राप्ति होती है। इस दिन व्रत और पूजा करने से समस्त पापों का नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस एकादशी के व्रत से विशेष रूप से शनि ग्रह के दुष्प्रभावों से मुक्ति मिलती है और जीवन में सुख, शांति और समृद्धि आती है। 
विज्ञापन


Sawan 2025: सावन के इन तिथियों पर रुद्राभिषेक करने से मिलते हैं विशेष फल, बरसती है महादेव की कृपा

देवशयनी एकादशी पूजा विधि
इस दिन सूर्योदय के पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करने चाहिए। इसके बाद, सूर्यदेव को जल अर्पित करते हुए भगवान विष्णु की पूजा का संकल्प लें। घर के मंदिर को स्वच्छ करें और भगवान विष्णु की मूर्ति या तस्वीर को गंगाजल से स्नान कराएं। उन्हें पीले वस्त्र पहनाएं और सुंदर फूलों से सजाएं। पूजा के लिए चंदन, तुलसी पत्र, अक्षत, धूप, दीप, नैवेद्य, पंचामृत, फल, और पीले फूलों का उपयोग करें।भगवान विष्णु की मूर्ति के समक्ष दीप प्रज्वलित करें और धूप, दीप, चंदन, पुष्प आदि अर्पित करें। भगवान विष्णु को पंचामृत और फल का नैवेद्य अर्पित करें। विष्णु सहस्रनाम या विष्णु स्तोत्र का पाठ करें।

विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें