छठ पूजा तिथि
08 नवंबर, सोमवार-नहाय खाय
09 नवंबर, मंगलवार-खरना
10 नंवबर, बुधवार- डूबते सूर्य को अर्घ्य
11 नवंबर, बृहस्पतिवार उगते हुए सूर्य को अर्घ्य
छठ के व्रत में इन नियमों का पालन जरूरी
छठ एक लोकास्था का महापर्व माना जाता ही, लेकिन इसके साथ इस व्रत को पूरा करने के कुछ कड़े नियम भी हैं। यदि आपने इन नियमों का पालन करते समय जरा भी गलती की तो छठी मैया रुष्ट हो सकती हैं।
- छोटे बच्चों को पूजा का कोई भी सामान छूने नहीं दें, यदि गलती से किसी बच्चे द्वारा ऐसा हो जाता है, तो ध्यान रखें कि ऐसे सामान का पूजा में इस्तेमाल न करें।
- जब तक पूजा पूर्ण न हो जाए बच्चे को तब तक प्रसाद न खिलाएं, ।
- छठ पूजा के समय व्रती या परिवार के सदस्यों के साथ कभी भी अभद्र भाषा का उपयोग न करें, साथ ही इस दौरान वाद विवाद की स्थिति से बचते हुए किसी के भी साथ झगड़ा न करें।
- जो भी महिलाएं छठ मैय्या का व्रत रखें, वह इन सभी चार दिनों तक पलंग या चारपाई पर न सोते हुए जमीन पर ही कपड़ा बिछाकर सोयें।
- छठ पर्व के दौरान व्रती समेत पूरे परिवार सात्विक भोजन ग्रहण करे।
- इस पर्व के दौरान साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखें, पूजा की किसी भी चीज को छूने से पहले हाथ अवश्य साफ कर लें।
- छठ मैय्या का व्रत रखने वाले अर्घ्य देने से पहले कुछ न खाएं।
- छठ पूजा के दिनों में फल खाने की मनाही है, ऐसे में फल तब ही खाए जा सकते है जब पूजा पूर्ण हो गई हो।
- इस पर्व के दौरान सूर्यदेव को अर्घ्य देना बेहद आवश्यक माना जाता है ऐसे में इसके लिए चांदी, स्टील या प्लास्टिक बर्तन इस्तेमाल बिलकुल न करें।
- छठ के प्रसाद का निर्माण करते समय व्रती को खुद कुछ भी खाने की मनाही है।
- ध्यान रहे छठ का प्रसाद बनाने के लिए ऐसी जगह चुनाव किया जाना चाहिए, जहां पहले खाना न बनता हो।
- छठ पूजा के दौरान गंदे कपड़े पहनना अशुभ माना जाता है अत: ऐसे में इन दिनों में साफ-सुथरे और शुद्ध कपड़े ही पहनें।