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Chhath Puja 2024: कब है छठ पूजा? यहां देखें नहाय-खाय से लेकर ऊषा अर्घ्य तक का कैलेंडर

Mon, 04 Nov 2024 12:08 PM IST
श्वेता सिंह धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

पंचांग के अनुसार छठ का महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से आरंभ होता है जो पूरे 4 दिनों तक रही है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती है।
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छठ पूजा 2024 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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Chhath Puja 2024 Start Date: हर साल छठ पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है। पंचांग के अनुसार छठ का महापर्व कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि से आरंभ होता है जो पूरे 4 दिनों तक रही है। इस दिन महिलाएं अपनी संतान की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य के लिए 36 घंटे तक निर्जला व्रत रखती है। इस खास मौके पर छठी मैया की विधि-विधान से पूजा की जाती है। छठ पूजा के दौरान चार दिनों तक सूर्य देव की विशेष पूजा करने की परंपरा है। इस पर्व को बिहार,झारखंड, पूर्वी उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल आदि स्थानों पर मनाते हैं। आइए जानते हैं छठ पर्व से जुड़ी अहम बातों के बारे में।

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कब है छठ पूजा? 
दृक पंचांग के अनुसार कार्तिक शुक्ल षष्ठी तिथि के साथ छठ पूजा आरंभ होती है। 
षष्ठी तिथि आरंभ:  07 नवंबर,  देर रात्रि 12: 41  
षष्ठी तिथि  समाप्त: 08 नवंबर, देर रात्रि 12: 34 पर 

कार्तिक छठ पूजा कैलेंडर 2024  
नहाय खाय- 05 नवंबर 2024
खरना- 06 नवंबर 2024
शाम का अर्घ्य- 07 नवंबर
सुबह का अर्घ्य- 08 नवंबर

छठ पूजा का महत्व

  • छठ पूजा की शुरुआत नहाय खाय के साथ होती है। इस शुभ अवसर पर नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इस दिन महिलाएं दिन में एक बार भोजन करती हैं।  
  • महापर्व का दूसरा दिन खरना कहलाता है। खरना वाले दिन सूर्योदय से लेकर सूर्यास्त तक महिलाएं निर्जला व्रत करती हैं।
  • इसके अगले दिन यानी तीसरे दिन डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। 
  • महापर्व के अंतिम दिन महिलाएं उगते सूर्य को जल देती हैं और शुभ मुहूर्त में व्रत का पारण करती हैं।

  
ध्यान रखें ये बातें 

  • छठ पूजा के दौरान बर्तन या पूजन सामग्री को झूठे हाथ से नहीं छूना चाहिए। ऐसा करने से साधक का व्रत खंडित हो जाता है।  
  • महापर्व के दौरान सात्विक भोजन का सेवन करना चाहिए।  
  • पहले से प्रयोग किए गए बर्तनों को पूजा में इस्तेमाल करना वर्जित है।

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डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): ये लेख लोक मान्यताओं पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।

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