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Chhath Puja 2023: सूर्यदेव की उपासना का महापर्व छठ पूजा आज, जानिए डूबते सूर्य को अर्घ्य देने का समय

Sun, 19 Nov 2023 09:44 AM IST
विनोद शुक्ला धर्म डेस्क, अमर उजाला

सार

19 नवंबर 2023 को व्रती महिलाएं शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी फिर अगले दिन यानी 20 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
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Happy Chhath Puja - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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Chhath Puja 2023: आज देशभर में सूर्य उपासना का महापर्व छठ पूजा बड़े ही धूम-धाम के साथ मनाया जा रहा है। छठ पूजा के तीसरे दिन सूर्यदेव और उनकी बहन छठ माता की विशेष पूजा आराधना की जाती है। वैदिक पंचांग के अनुसार हर साल कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की षष्ठी तिथि को छठ महापर्व मनाया जाता है। छठ पूजा नहाय-खाय के साथ शुरू होती है। फिर षष्ठी तिथि को छठ का पहला अर्घ्य दिया जाता है। सूर्यदेव की उपासना का सबसे बड़ा और खास पर्व छठ का त्योहार होता है। संध्या समय अर्घ्य देने से कुछ विशेष तरह के लाभ होते हैं। इससे नेत्र ज्योति बढ़ती है, लम्बी आयु मिलती है और आर्थिक सम्पन्नता आती है। चार दिनों तक चलने वाले छठ पूजा पर्व में भगवान सूर्यदेव की पूजा के साथ छठी मैय्या की पूजा की जाती है। इस दिन महिलाएं व्रत रखती हैं और अपनी संतान की लंबी आयु और सुख-समृद्धि की कामना के लिए छठी मैय्या से आशीर्वाद प्राप्त करती हैं। छठ पर्व के तीसरे दिन व्रती महिलाएं शाम के समय डूबते हुए सूर्यदेव को अर्घ्य देती हैं इसके लिए व्रती महिलाएं किसी पवित्र नदी और तालाब में कमर तक पानी में डूबकर सूर्य देव को अर्घ्य देती हैं।

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आज सूर्यदेव को अर्घ्य देने का मुहूर्त 
वैदिक पंचांग के अनुसार छठ का तीसरा दिन बहुत खास होता है। इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य दिया जाता है। पंचांग की गणना के मुताबिक आज सूर्यास्त का समय 05 बजकर 26 मिनट पर होगा। ऐसे में सभी व्रती महिलाएं सूर्यदेव को अर्घ्य इस समय दे सकती हैं। 

क्यों दिया जाता है डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य ?
छठ पर्व चार दिनों तक चलता है। पहले दिन नहाय-खाय, दूसरे दिन खरना, तीसरे दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य और चौथे दिन उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत पूरा किया जाता है। छठ पर्व का तीसरा दिन बहुत खास होता है क्योंकि इस दिन डूबते हुए सूर्य देव को अर्घ्य दिया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने के पीछे मान्यताएं हैं। कार्तिक माह स्नान,पूजा और दान करने का विशेष महत्व होता है। इस माह में भगवान विष्णु जल में ही निवास करते हैं। वहीं सूर्य देव प्रत्यक्ष देवता और भगवान विष्णु का ही प्रत्यक्ष रूप माना जाता है। इस दिन डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देने का मतलब है कि भगवान विष्णु सूर्यदेव के रूप और जल में भगवान विष्णु की अप्रत्यक्ष रूप से दोनों की साथ में पूजा की जाती है। अर्घ्य देने के लिए एक लोटे में जल लेकर उसमें कुछ बूंदें कच्चा दूध मिलाएं। इसी पात्र में  लालचन्दन,चावल,लालफूल और कुश डालकर प्रसन्न मन से सूर्य की ओर मुख करके कलश को छाती के बीचों-बीच लाकर सूर्य मंत्र का जप करते हुए जल की धारा धीरे-धीरे प्रवाहित कर भगवान सूर्य को अर्घ्य देकर पुष्पांजलि अर्पित करना चाहिए।
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सूर्य पूजा से लाभ
भविष्य पुराण के अनुसार सूर्य की उपासना से आरोग्य, ऐश्वर्य, धन और संतान की प्राप्ति होती है। सूर्योपनिषद के अनुसार सूर्य की किरणों में समस्त देव, गंधर्व और ऋषिगण निवास करते हैं। सूर्य की उपासना गंगा नदी में स्नान या फिर घर में गंगाजल डालकर स्नान करने और भगवान सूर्य की आराधना करने से जाने-अनजाने, शरीर, वचन, मन, पिछले और वर्तमान जन्म में किए गए सभी प्रकार के पाप धुल जाते है।

20 नवंबर को छठ पर्व होगा पूरा
छठ पर्व के दूसरे दिन यानी खरना पर शाम को व्रती महिलाएं खरना का प्रसाद ग्रहण कर अगले 36 घंटे का निर्जला व्रत शुरू हो जाता है। 19 नवंबर 2023 को व्रती महिलाएं शाम के समय डूबते हुए सूर्य को अर्घ्य देंगी फिर अगले दिन यानी 20 नवंबर को उगते हुए सूर्य को अर्घ्य देकर व्रत का पारण किया जाता है।
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सूर्यदेव से जुड़ी खास बातें
1- सूर्यदेव मात्र एक प्रत्यक्ष देवता है। 
2- सूर्यदेव को पंचदेवों में से एक माना गया है।
3- सूर्यदेव 9 ग्रहों के राजात हैं। 
4- भगवान श्रीकृष्ण भी सूर्यदेव की पूजा करते हैं।
5- बजरंगबली के गुरु हैं सूर्यदेव
6-शनिदेव, यमराज और यमुना सूर्यदेव की संताने हैं।
7-सूर्यदेव की उपासना से आत्मविश्वास बढ़ता है।
8- तांबे के लोटे से सूर्यदेव को जल अर्पित करना शुभ

सूर्य उपासना के मंत्र
सूर्य देव की उपासना और पूजा में गायत्री मंत्र का जाप करना अच्छा माना गया है।

गायत्री मंत्र- ऊँ भूर्भुव: स्व: तत्सवितुर्वरेण्यं भर्गो देवस्य धीमहि। धियो यो न: प्रचोदयात्।।

ऊँ ऐही सूर्यदेव सहस्त्रांशो तेजो राशि जगत्पते।
अनुकम्पय मां भक्त्या गृहणार्ध्य दिवाकर:।।

ऊँ सूर्याय नम:
ऊँ आदित्याय नम:
ऊँ नमो भास्कराय नम:।
अर्घ्य समर्पयामि।।

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