अपहरण के दो साल बाद 22 अगस्त, 2016 को विक्रांत की निशानदेही पर सीआईडी ने भराड़ी पेयजल टैंक से युग का कंकाल बरामद किया। इसी दिन चंद्र शर्मा, तेजेंद्र पॉल को गिरफ्तार किया। इतने दिन पेयजल टैंक में कंकाल रहा और वही पानी संबंधित इलाकों में सप्लाई भी होता रहा। 25 अक्तूबर, 2016 को सीआईडी ने जिला एवं सत्र न्यायालय में आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट पेश की।
20 फरवरी, 2017 को इस अपहरण और हत्या के मामले का शुरू हुआ ट्रायल 27 फरवरी, 2018 तक चला। सीआईडी द्वारा पेश चार्जशीट में शामिल कुल 130 गवाहों में से 105 की गवाही हुई और एक गवाह मुकर गया। सोमवार दोपहर करीब 2:25 बजे तीनों आरोपियों को अदालत के समक्ष पेश किया और अदालत ने तीनों को दोषी करार दिए जाने का फैसला सुनाया।
इस जघन्य अपराध के अदालत में चल रहे केस के फैसले का युग के माता-पिता और परिजनों सहित पूरे शहर को बेसब्री से इंतजार था, जो अब समाप्त हो गया है। अब अदालत इसमें दोषी करार दिए तीनों आरोपियों को क्या सजा सुनाती है, इस पर सबकी निगाह रहेगी।
तीनों दोषी युग को मोबाइल पर वीडियो गेम खेलने का लालच देकर गोदाम में ले गए और वहां उसके हाथ-पांव और मुंह पर टेप बांध दी। एक पेटी में डालकर उसे गाड़ी में राम चंद्रा चौक के पास किराये के मकान में ले जाया गया। मासूम युग को कई यातनाएं दी गईं। नशे में आरोपी उसे बुरी तरह प्रताड़ित करते रहे। बाद में पकड़े जाने के डर से आरोपियों ने युग के गले में एक बड़ा पत्थर बांधकर नगर निगम के पानी के स्टोरेज टैंक में जिंदा फेंक दिया।
युग के पिता विनोद गुप्ता ने कहा कि मेरे चार साल के मासूम बच्चे का अपहरण, उसे यातना दे-दे कर मारने वाले तीनों हत्यारों को फांसी की सजा भी कम है। उन्हें फांसी पर लटका देना चाहिए।