न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह की अदालत ने सुनाया फैसला, दस हजार रुपये जुर्माना भी देना होगा
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जुर्माना न देने पर एक माह का होगा अतिरिक्त कारावास
संवाद न्यूज एजेंसी
शिमला। विशेष एनडीपीएस अदालत शिमला के न्यायाधीश यजुवेंद्र सिंह ने नशीले पदार्थों की तस्करी के एक मामले में आरोपी को दोषी ठहराते हुए आठ महीने के कठोर कारावास और 10 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है। जुर्माना अदा न करने पर दोषी को एक माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा।
यह मामला 10 जनवरी 2020 का है। बालूगंज पुलिस थाना की टीम तारादेवी-टुटु बाईपास के पास अपराध रोकथाम और यातायात जांच के लिए तैनात थी। शाम करीब चार बजे टुटु-एयरपोर्ट रोड की तरफ से आ रही मारुति कार को पुलिस ने तलाशी के लिए रोका। कार चला रहा शिमला निवासी उदित ठाकुर पुलिस कर्मियों के सवालों पर घबरा गया जिससे पुलिस का शक गहरा गया। पुलिस ने मौके पर खराब खड़ी एचआरटीसी बस के चालक और परिचालक को जांच में स्वतंत्र गवाह बनाया। कार के डैशबोर्ड की तलाशी लेने पर फॉयल पेपर और बीड़ी के पन्ने में लपेटकर रखा चिट्टा बरामद हुआ। फॉरेंसिक लैब जुन्गा की जांच रिपोर्ट में बरामद पदार्थ का शुद्ध वजन 4.025 ग्राम पाया गया। सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष के वकील ने दलील दी कि आरोपी का कोई पुराना आपराधिक रिकॉर्ड नहीं है और वह अपने परिवार का अकेला कमाने वाला सदस्य है। इसलिए उस पर रहम बरता जाए। अभियोजन पक्ष ने आरोपी को सख्त सजा देने की मांग करते हुए कहा कि चिट्टा और हेरोइन जैसे घातक नशे हिमाचल के युवाओं के भविष्य को दीमक की तरह चाट रहे हैं।
अदालत ने सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला देते हुए कहा कि नशीले पदार्थों के अवैध कारोबार में लिप्त लोग समाज के निर्दोष युवाओं को मौत के मुंह में धकेलने का काम कर रहे हैं। नशे का पूरे समाज पर घातक प्रभाव पड़ता है। ऐसे मामलों में व्यक्तिगत परिस्थितियों का हवाला देकर कोई नरमी नहीं बरती जा सकती। अदालत ने सभी साक्ष्यों और लिंक एविडेंस को मजबूत मानते हुए दोषी को एनडीपीएस एक्ट की धारा 21 के तहत सजा सुनाई।